






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 दिसम्बर 2022। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर पर गंभीर वित्तीय अनियमिताओं के आरोप अकादमी के सरस्वती सभा सदस्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार मीठानाथ मीठेश निर्मोही ने लगाए है। निर्मोही ने अकादमी अध्यक्ष एवं सचिव को पत्र देकर अकादमी की परंपरा तथा अकादमी संविधान के प्रतिकूल हो रही लाखों रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। और इस प्रकरण में तत्काल ही संज्ञान लेने हेतु लिखे गये पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं कला,साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के मंत्री बी डी कल्ला को भी प्रेषित की गई है। निर्मोही ने अपने पत्र में अकादमी की वे शक्तियां जो अकादमी संविधान के अनुसार ‘सरस्वती सभा ‘और ‘संचालिका’ तथा ‘वित्त समिति ‘ एवं अन्य उप समितियों में निहित हैं, उन पर अध्यक्ष एवं सचिव ने अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण कर लिया है। और लाखों रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरतते हुए पद का दुरुपयोग कर किया जा रहा है। राजस्थान साहित्य अकादमी के उज्ज्वल इतिहास को, राजस्थान साहित्य अकादमी की गरिमामय एवं गौरवशाली परंपरा रही है, उसे धूमिल कर अप्रतिष्ठ कर रहे हैं।
आप भी पढें वरिष्ठ साहित्यकार का पत्र, उन्हीं के शब्दों में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वरिष्ठ साहित्यकार मीठानाथ मीठेश निर्मोही ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्यपाल की आज्ञा से राजस्थान सरकार के कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के आदेश दिनांक 22/08/2022 के द्वारा राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर में दुलाराम सहारण को अध्यक्ष तथा मीठानाथ मीठेश निर्मोही, जोधपुर एवं किशन दाधीच, उदयपुर को विशिष्ट साहित्यकार के रूप में सरस्वती सभा का सदस्य मनोनीत किया गया। सभी ने अगस्त, 2022 में ही राजस्थान साहित्य अकादमी में राज्य सरकार के आदेश की अनुपालना में कार्यग्रहण कर लिया था। कार्यग्रहण करने के पश्चात अकादमी संविधान के नियम 13(घ) 5 के अंतर्गत राजस्थान सरकार की ओर से मनोनीत अध्यक्ष एवं सरस्वती सभा के सदस्यों को सरस्वती सभा में राजस्थान के 15 विशिष्ट साहित्यकारों को शामिल करते हुए ‘सरस्वती सभा’ का गठन करना था। और इसके बाद उपाध्यक्ष का चुनाव तथा अकादमी संविधान नियम 10 (क) के तहत ‘ सरस्वती सभा’ द्वारा कोषाध्यक्ष की नियुक्ति की जानी थी। अकादमी की ‘संचालिका’ का गठन भी कराया जाना था। लेकिन अध्यक्ष एवं मंत्री द्वारा अकादमी में उपर्युक्त गठन से पहले ही कोषाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे उदयपुर के जिला कोषाधिकारी को हटाकर अपनी सुविधा और निजी हितों को देखते हुए अपने ही शहर चूरू के एक सेवानिवृत्त कार्मिक को अकादमी में कोषाध्यक्ष जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया। जबकि अकादमी संविधान के अनुसार यह नियुक्ति सरस्वती सभा द्वारा की जानी थी। कोषाध्यक्ष की नियुक्ति में अकादमी संविधान के जिस प्रावधान का उल्लेख किया गया है, वह प्रावधान तो सरस्वती सभा के अस्तित्व में रहते हुए कोषाध्यक्ष का पद रिक्त होने पर तथा सरस्वती सभा तथा संचालिका की बैठक तत्काल आयोजित न कर पाने की स्थिति में कार्य संचालन में बाधा न हो इस लिए किया गया है। यह प्रावधान सरस्वती सभा के अस्तित्व में ही नहीं होने की स्थिति में लागू नहीं होता है और ऐसी स्थितियां / परिस्थितियां भी नहीं है कि अकादमी की सरस्वती सभा का गठन न हो सके। उन्होंने यह भी लिखा है कि अध्यक्ष एवं सचिव से सरस्वती सभा, संचालिका, वित्त समिति आदि के गठन हेतु मेरे साथ किशन दाधीच द्वारा बार बार अनुरोध किया गया। लेकिन अध्यक्ष एवं मंत्री यह कहते हुए टालते रहे कि आगामी सप्ताह भर में गठन की कार्यवाही कर ली जाएगी। 15 दिन पश्चात भी अपेक्षित कार्यवाही नहीं होने पर आप दोनों को पुनः याद दिलाया गया। इसके उपरांत भी बार-बार अनुरोध किया गया लेकिन अध्यक्ष व मंत्री ने यह को अनसुना कर दिया। जबकि प्रदेश की लगभग सभी अकादमियों का गठन पूरा हो चुका है। अध्यक्ष मंत्री अपने-अपने पद का दुरुपयोग कर तथा गंभीर अनियमितताएं बरतते हुए मन चाहे अनुसार आयोजन दे रहे हैं और इन आयोजनों की अध्यक्षता कर अपने आत्मप्रचार में लगे हुए हैं। निर्मोही ने अकादमी के अध्यक्ष एवं सचिव को यह भी लिखा है कि अकादमी संविधान के अन्तर्गत विधि अनुसार सरस्वती सभा, संचालिका, वित्त समिति अन्य संवैधानिक पदों यथा उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष तथा समितियों तथा उप समितियों के सदस्यों की नियुक्ति मनोनयन की चार माह से लंबित कार्यवाही तत्काल संपादित करें। आप लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं बरतते जा रहे हैं। इन सारे कार्यकलापों के लिये आप व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।



