






श्रीडूंगरगढ टाइम्स 24 दिसंबर 2022। महापुरूषों को जातिबंधन में नहीं बांधना चाहिए वे पूरी मानव जाति के लिए प्रेरणा प्रस्तुत करते है। महापुरूषों के नाम पर राजनीति करने वाले समाज के सामने गलत धारणाएं बता देते है। ये बात श्रद्धालुओं को समझाते हुए प्रसिद्ध आचार्य कौशिक महाराज ने कही। आचार्य ने माहेश्वरी भवन में आयोजित वशिष्ट संहिता कथा के सुत्र बताते हुए कहा कि गुरू की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गुरू के बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना शांति नहीं, शांति बिना मुक्ति संभव नहीं है। आचार्य ने वास्तु शास्त्र के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए निर्माण कार्य करवाने से पूर्व वास्तु का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने भूमि चयन व परीक्षण का विधान भी बताया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने महाराज से दीक्षा ग्रहण कर गुरू मंत्र सुना। कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को व्यास पूजन व आरती आयोजक परिवार के रामरतन व किरण देवीपारीक ने की। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया आज सुबह हवन पूजन के साथ कथा का समापन हुआ जिसमें पारीक परिवार सहित उनके अनेक मित्रों ने परिवार सहित भाग लिया। आयोजक परिवार ने सेवा में जुटें युवाओं व सभी संतो का आभार जताया।






