


जिले से जयपुर तक किया संघर्ष फिर भी हारी जनता की पसंद।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कई टिकिटों के लिए जिले से जयुपर तक संघर्ष हुआ। दोनों पार्टी के शीर्ष नेताओं की दखल के बाद भी कुछ टिकिटें काट दी गई। एक दिग्गज नेता जिन्होंने पंचायतों के परिसीमन में एक ग्राम पंचायत को रीड़ी पंचायत समिति से निकलवा कर श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति में शामिल करवाया की टिकिट भी काट दी गई। वहीं पूर्व पालिकाध्यक्ष भी चुनाव मैदान से बाहर है। कुछ टिकिटों में वार्डवासी भी जिलाध्यक्ष मुलाकात करके आए व अपनी पसंद के प्रत्याशी को टिकिट देने की मांग की। वहीं नेताओं की मनमर्जी ही चलती नजर आई।
टिकिट बंटवारे से बढ़ी नाराजगी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। टिकट बंटवारे से अनेक कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी बढ़ती नजर आई है। भाजपा से करीब 40 साल का हिसाब जनता द्वारा मांगा जाएगा वहीं कांग्रेस से भी पांच साल का विजन पूछा जाएगा। विकास मंच भ्रष्टाचार के खिलाफ व सेवा के नाम पर वोट मांगेगी वहीं माकपा भी वार्ड में घर घर संपर्क की रणनीति बना रही है। वहीं आरएलपी भी शहर में अपनी जमीन तलाश करने के प्रयासों में जुट गई है।
सभी पार्टियों का फैसला जनता के दरबार में..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नामांकन पूरे होते ही अब गेंद जनता के पाले में आ गई है। चुनावी रण सजते ही टिकट वितरण ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। जनता की पसंद और पार्टी के फैसले के बीच बढ़ते अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन चेहरों को जनता मजबूत दावेदार मान रही थी। उन्हें टिकट नहीं मिलने से समर्थकों में निराशा की बात कही। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जनता की नाराजगी को वोट में बदलने से रोकने की होगी।
भाजपा के सामने विकास के साथ विरोध और आरोपों की चुनौती
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भाजपा के सामने गत कार्यकाल के आरोपों व विरोध से निपटना, वर्तमान की नाराजगी दूर करना भी चुनौती साबित होगा। वहीं कांग्रेस में अंदरखाने बोर्ड बनाने की रणनीति बनाई जा रही है। भाजपा इस चुनाव में विकास के मुद्दे पर वोट मांगने की तैयारी में है, और यही विकास के नाम पर ही भाजपा घीरती नजर आएगी। वहीं अपने ही खेमे से उठते सवाल बड़ी चुनौती बनेंगे। अब भाजपा के सामने सवाल ये है, कि वह विकास के दावों के साथ इन आरोपों और टिकट से उपजी नाराजगी का जवाब जनता को कैसे देगी? क्या भाजपा विकास के नाम पर वोट मांग पाएगी, या टिकट का विरोध और पुराने आरोप चुनावी मुद्दा बन जाएंगे?
कांग्रेस से भी पूछा जाएगा—5 साल में विपक्ष कहां था?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दूसरी ओर कांग्रेस भले ही भाजपा को घेरने की तैयारी में हो, लेकिन उसके सामने भी जनता का अपना सवाल है। पिछले पांच वर्षों में शहर और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने कितने बड़े आंदोलन किए? कितनी बार जनता की आवाज को मजबूती से सड़क से लेकर प्रशासन तक पहुंचाया? जनता के बीच यह चर्चा भी है कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस जनता के मुद्दों पर उतनी आक्रामक नजर नहीं आई, जितनी उससे उम्मीद थी। अब चुनाव के समय भाजपा से सवाल पूछने के साथ कांग्रेस से भी उसके पांच साल के विपक्षी प्रदर्शन का हिसाब मांगा जा सकता है।
माकपा, रालोपा और विकास मंच के पास दोनों दलों को घेरने का मौका
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शहर में अब नई एंट्री के लिए इस चुनावों में बड़ा मौका है CPMI, RLP और विकास मंच के पास, यह चुनाव एक बड़ा अवसर बनता दिखाई दे रहा है। ये संगठन पिछले पांच वर्षों की कथित विफलताओं, अधूरे कामों और जनता से जुड़े मुद्दों को सामने रखकर भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरने की कोशिश करेंगे। यानी इस बार लड़ाई सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं रहने वाली। मुकाबला तीन मोर्चों पर दिखाई दे रहा है— भाजपा के सामने विकास और आरोपों का सवाल, कांग्रेस के सामने पांच साल के विपक्ष का हिसाब और तीसरे मोर्चे के सामने दोनों दलों की कथित कमियां जनता तक पहुंचाने की चुनौती रहेगी।




