






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 मई 2026। निडर और वचन के पक्के वीर तेजाजी महाराज की कथा आज भी मानव जाति के लिए प्रेरणीय है। अपने वचन के लिए गौसेवार्थ प्राणोत्सर्ग करने वाले महामानव शिव का अवतार थे। ये बात कथावाचिका विमला बाईसा ने वीर तेजा मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व गुरूवार को प्रारंभ हुई तेजाजी कथा में कही। कथावाचिका ने कथा के पहले दिन तेजाजी के जन्म और बचपन का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नागौर के खरनाल गांव में धौलिया जाट परिवार में जन्मे तेजाजी का जन्म माता रामकंवरी और पिता ताहड़देव के घर, नागदेवता के आशीर्वाद से हुआ था। कथा पांडाल तेजाजी के जयकारों से गूंज उठा। इससे पहले सुबह बिग्गाबास स्थित गणेश मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें 1108 महिलाएं व कन्याएं मंगलवेष में कलश लेकर शामिल हुई। कलश यात्रा में बैंड ढोल नगाड़ों की धुन पर तेजा भक्त झूमते हुए तेजाजी मंदिर तक पहुंचे। मार्ग में श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की और जगह जगह जलसेवा दी। पंडित कैलाश सारस्वत से हवन एवं पूजन संपन्न करवायाl आज कथा के मुख्य यजमान के रूप में तुलछीराम गोदारा ने परिवार सहित पूजन में शामिल हुए। श्रीडूंगरगढ़ सहित विभिन्न गांवो से श्रद्धालु कथा में शामिल हुए। ट्रस्ट के अनेक कार्यकर्ता विभिन्न व्यवस्थाओं में जुटे रहें।




