






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 मई 2023। थानाधिकारी ने एक मामले में एफआर लगाई और असन्तुष्ट परिवादी ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने थानाधिकारी को दुर्भावना से जांच करने का दोषी मानते हुए धारा 166 के तहत कार्रवाई की। मामले में 10 साल बाद तत्कालीन थानाधिकारी को कोर्ट से राहत मिल गई है और कोर्ट ने आदेश को अपास्त कर दिया व फैसला उनके पक्ष में हो गया है। 2013 में थानाधिकारी श्रीडूंगरगढ़ के पद पर कार्यरत दिनेश कुमार मीणा के विरूध अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2017 में धारा 166 भारतीय दंड संहिता के विरूद्ध प्रसंज्ञान आदेश दिया। आदेश की निगरानी कोर्ट में प्रस्तुत करने व कानूनी बहस के बाद कोर्ट ने आदेश अपास्त कर दिया है। मामले की पैरवी मीणा की ओर से युवा एडवोकेट दीपिका करनानी ने की। वर्तमान में मीणा की पदोन्नति हो गई है व फिलहाल जयपुर में पुलिस विभाग को सेवाएं दे रहें है।
ये था मामला..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव आड़सर के महावीर प्रसाद ने एक एफआईआर धारा 447, 427, 147, 504 आदि में दर्ज करवाई थी। जिसकी तफ्दीश दिनेश कुमार मीणा के पास थी। मीणा ने मुकदमे को झूठा मानते हुए इसमें एफआर न्यायालय में पेश की। फैसले से असंतुष्ट महावीर ने एसीजीएम कोर्ट में पीटीशन दाखिल की और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। एसीजीएम कोर्ट ने मीणा द्वारा प्रस्तुत एफआर को अस्वीकार कर जुगल किशोर, अशोक कुमार व संतोष के खिलाफ धारा 447, 427, 147, 504 में अपराध का प्रसंज्ञान लिया। तथा इसके साथ ही कोर्ट ने तत्कालीन थानाधिकारी दिनेश कुमार पर दुर्भावना पूर्वक अनुसंधान किया मानकर उनके विरूद्ध भी धारा 166 में अपराध का प्रसंज्ञान लिया। इस आदेश के विरूद्ध मीणा के पक्ष में एडवोकेट दीपिका करनाणी ने पैरवी की व अतिरिक्त जिला एंव सेशन न्यायालय श्रीडूंगरगढ़ में निगरानी प्रस्तुत की। बहस के बाद कोर्ट ने तत्कालीन थानाधिकारी दिनेश कुमार मीणा को राहत दी है।
ये थी एफआईआर..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव आड़सर के महावीर ने जुगलकिशोर, अशोक कुमार व संतोष के खिलाफ शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने, आपराधिक अतिचार कर लड़ाई झगड़ा करने, व नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था।



