May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 सितंबर 2023। इन दिनों स्वीप शब्द ने धूम मचा रखी है। चाहे प्रिंट मीडिया हो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या फिर सोशल मीडिया, सभी में स्वीप की चर्चा अवश्य होती है। यहाँ तक कि सोशल मीडिया के इस दौर में लोक मीडिया यथा – कठपुतली, नुक्कड़ नाटक आदि, जिसका प्रचलन अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, का भी प्रयोग हो रहा है। जब भी कोई गतिविधि होती है तो स्वीप का प्रसंग अवश्य आता है। भारत निर्वाचन आयोग का सर्वाधिक फोकस भी ‘स्वीप’ पर है। आखिर यह ‘स्वीप’ क्या है और इसे इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है ?
आइए ! जानते हैं विस्तार से।
शिक्षा एक व्यक्ति को बुद्धिमान एवं विवेकशील बनाने का साधन है। जागरूकता के अभाव में शिक्षा अधूरी है।
लोकतंत्र देश का आधार है किन्तु मजबूत लोकतंत्र की स्थापना के लिए उस देश के नागरिकों में जागरूकता होना नितांत आवश्यक है। व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को याद रखना जरूरी है। मताधिकार उसका अधिकार है किन्तु मत देना उसका कर्तव्य भी है। मत दर्ज करने के अभाव में मताधिकार कोई मायने नहीं रखता। अतः
‘मजबूत लोकतंत्र में सबकी भागीदारी’ सुनिश्चित करने के लिए देश के हर एक नागरिक को शिक्षित एवं जागरूक बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीप कार्यक्रम शुरू किया गया है। स्वीप का अर्थ है – सुव्‍यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता यह अधिकाधिक मतदाता शिक्षा एवं जागरूकता के प्रचार-प्रसार का सार्वजनिक मंच है। सन 2009 से आयोग द्वारा हर नागरिक का निर्वाचक के रूप में पंजीकरण एवं पंजीकृत निर्वाचक को उसके मताधिकार के लिए जागरूक करने का कार्य स्वीप के माध्यम से किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत विभिन्न सामाजिक-आर्थिक, सांस्‍कृतिक और जनसांख्यिकीय प्रोफाइल के आधार पर गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। साथ ही निर्वाचन इतिहास एवं गत चुनावी अनुभवों को ध्यान में रखते हुए देश के आम नागरिक को निर्वाचन से जोड़ने का कार्य किया जाता है।
स्वीप गतिविधियों के माध्यम से देश के नागरिकों को मतदाता सूची में पंजीकरण, पंजीकृत मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया, आदर्श आचरण संहिता की पालना, ई वी एम की कार्यप्रणाली, मत का महत्व, निर्वाचन में आईसीटी का प्रयोग, निर्वाचन में नैतिकता आदि की जानकारी दी जाती है। स्वीप कार्यक्रम वर्ष भर चलता है। चुनावी वर्ष में इसे अधिक गति प्रदान की जाती है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता बनने से और मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे। आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। इस दिवस को यादगार बनाने के लिए सन 2011 से इस दिवस को मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर मतदाता दिवस के लिए एक थीम बनाई जाती है तथा वर्ष भर उस थीम के अनुसार कार्यक्रम होते हैं। भावी मतदाताओं को निर्वाचन जागरूकता के लिए स्वीप के अन्तर्गत शिक्षण संस्थानों में निर्वाचन साक्षरता क्लब, संगठनों एवं कार्यालयों में मतदाता जागरूकता मंच, मतदान केंद्रों पर चुनावी पाठशालाओं की स्थापना की गई हैं। हेलो वोटर रेडियो, आयोग एवं कार्यालयों की वेबसाइट्स, वेब पोर्टल्स, टोल फ्री नं 1950, बीएलओ पत्रिका, वोटर गाइड आदि के द्वारा आम जन तक जानकारी पहुँचाने का कार्य किया जाता है। मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण एवं इत्तर काल में क्लस्टर एवं विशेष शिविरों, रैलियों आदि का आयोजन किया जाता है। विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं के माध्यम से जागरूक मतदाताओं को सम्मानित किया जाता है। स्वीप की जानकारी के लिए आयोग की स्वीप वेबसाइट है जिसमें विविध गतिविधियाँ, प्रतियोगिताओं के आयोजन, विभिन्न प्रकार के अवार्ड्स की जानकारी तथा कार्यक्रमों के फोटो, वीडियो उपलब्ध हैं। इस वेबसाइट को https://ecisveep.nic.in लिंक पर क्लिक कर एक्सेस किया जा सकता है।
संक्षेप में,
स्‍वीप का मुख्य लक्ष्‍य निर्वाचनों के दौरान उचित निर्णय लेने के लिए मतदाताओं को प्रोत्‍साहित करना है ताकि हर मतदाता अपने मत का महत्व समझे तथा जागरूक, सक्षम एवं निर्भीक होकर नैतिकता के साथ मतदान करे जिससे स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण तरीके से पारदर्शिता के साथ चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न हो और हमारा लोकतंत्र सही मायने में मजबूत बने।
आइए ! हम सभी स्वीप गतिविधियों से जुड़ें, इनकी जानकारी प्राप्त कर लक्षित समूह तक पहुँचाएं।