May 20, 2026
निखार दिया श्मशान का स्वरूप, रोजाना करते है श्रमदान।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 दिसंबर 2023।  ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने 60 साल की उम्र में कहा कि कि जो लोग 60 साल की उम्र के बाद जिंदगी को जीना नहीं सिर्फ काटना समझते है वे समझ ले की “Age is Just a Number”. यानी उम्र तो महज एक संख्या है। हमारी अपनी बोली में भी एक कहावत है कि – “साठ पार ठाठ” तो बता देवें संडे पॉजिटिव स्टोरी में कि आप अगर साठ के आस पास है या पार हो गए है तो चिंता छोड़े और जीवन को उत्सव मानकर जिए।  वर्तमान समय में रिटायर्ड होने के बाद अक्सर लोग अवसाद का शिकार हो जाते है और स्वयं को बुजुर्ग मानकर बीमार तक मानने लग जाते है। ऐसे में क्षेत्र के गांव बिग्गाबास रामसरा में सीनीयर सिटीजन का एक ऐसा ग्रुप है जो अपने हमउम्र को ही नहीं युवा वर्ग को भी सकारात्मक ऊर्जा की प्रेरणा देते हुए नजर आ रहा है। ग्रुप में रिटायर्ड बैंककर्मी श्रवण कड़वासरा, मदनलाल आचार्य, सुरजाराम मेघवाल, गोपाल सियाग, जवाहराराम, जगदीश स्वामी, शेराराम नायक की टोली है और ये सभी इस उम्र में एक नई ऊर्जा से सकारात्मक योगदान धरती का श्रृंगार करने में दे रहें है। ये टोली अलसुबह ही घर से घुमने निकलती है और रोजाना जनहित में नि:स्वार्थ श्रमदान कर रही है। टोली ने गांव के उजाड़ पड़े श्मशान भूमि में झाड़ झंकाड़ हटाया और यहां अपने पुरूषार्थ से एक हजार से अधिक पेड़ लगाए है। जैसे जैसे ये पेड़ बड़े हो रहें है वैसे वैसे गांव के अन्य ग्रामीण इस कार्य की सराहना कर रहें है। टाइम्स कार्यालय तक भी ये बात पहुंची तो जानकारी ली गई। बिग्गाबास रामसरा के इस श्मशान भूमि में श्रवण कड़वासरा ने एक शिव मंदिर का निर्माण करवाया है। वहीं मदनलाल आचार्य ने पंछियों के लिए एक चुग्गाघर का निर्माण भी करवाया है। इनका लोकार्पण करने वाले सरपंच व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी टोली के कार्यों की सराहना की। श्रवण कड़वासरा ने जिंदादिली के साथ बताया कि हम सीनियर सिटीजन है और जीवन के इस दौर में धरती पर कुछ अच्छा करने करने की चाहत में है। कड़वासरा ने कहा कि जीवन तो जिंदादिली का नाम है। हंसते हुए कहते है कि ऐसा कार्य कर लेवें जिससे गांव में जाने के बाद भी कोई याद कर सकें। दल के शेराराम नायक ने प्रसन्नता के साथ कहा कि रोजाना सुबह हमारा घुमना हो जाता है और श्मशान भूमि में श्रमदान देकर साफ सफाई भी कर देते है जिससे यहां शव लेकर आने वाले परिजनों को समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े। मदनलाल आचार्य ने अपनी उम्र के नए जोश को जताते हुए कहा कि बुजुर्ग होने से ज्यादा मान लेना ही खराब है। जब तक चल सकते है तब तक कुछ करते रहेंगे जिससे जीवन में क्रियाशीलता रहें। तो आप भी यही साठ पार है या साठ के आस पास है तो इस उम्र में एक नई पहल करने के साथ लगातार उसके लिए प्रयास करना प्रारंभ कर देवें। ये सीनीयर सिटीजन की टोली आज के युवावर्ग को भी जीवन में नई पहल से घबराए बिना, लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देती है। क्षेत्र में इन बुजुर्गों का ये सार्थक कार्य वास्तव में प्रकृति व धरती के श्रृंगार के लिए कारगर साबित होगा। ये अपनी उम्र के हरएक सीनीयर सिटीजन को जो स्वयं को बुजुर्ग मान लेता है उन्हे कुछ तो सीखा ही रहें है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मस्तमौला बुजुर्गों की टोली, हंसी ठिठोली के साथ करते है रोजाना श्मशान में श्रमदान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अनेक ग्रामीण यहां पंछियों के लिए चुग्गा डालते है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्मशान में करवाया शिव मंदिर का निर्माण।