May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 नवंबर 2020। 14 नवंबर को चतुर्दशी तिथि पड़ रही है जो दोपहर 2:14 तक रहेगी। इसके बाद अमावस तिथि का आरंभ हो जाएगा जो 15 नवंबर की सुबह 10:00 बजे तक रहेगी। हालांकि, 15 तारीख को केवल स्नान दान की अमावस्या की जाएगी। गौरतलब है कि लक्ष्मी पूजा संध्याकाल या रात्रि में दिवाली में की जाती है।
गृहस्थों के लिए पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल सायं 5 बजकर 24 मिनट से रात्रि 8 बजकर 06 तक प्रदोष काल मान्य रहेगा। इसके मध्य रात्रि 7 बजकर 24 मिनट से सभी कार्यों में सफलता और शुभ परिणाम दिलाने वाली स्थिर लग्न ‘वृषभ’का भी उदय हो रहा है। प्रदोष काल से लेकर रात्रि 7 बजकर 5 मिनट तक लाभ की चौघड़िया भी विद्यमान रहेगी। यह भी मां श्रीमहालक्ष्मी और गणेश की पूजा के लिए श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक है। इसी समय परम शुभ नक्षत्र ‘स्वाति’भी विद्यमान है जो 8 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। सभी गृहस्थों के लिए इसी समय के मध्य में माँ श्रीमहालक्ष्मी जी की पूजा-आराधना करना श्रेष्ठतम रहेगा। इस दीपावली पर सर्वार्थ सिद्धि का योग बन रहा है। दीपावली पर देव, गुरु, बृहस्पति और न्याय के देवता शनि कृपा दृष्टि बरसाएंगे। दो पुष्य नक्षत्र का योग इस दीपावली को बेहद खास और शुभदायी बनाने जा रहा है। गणेश, दीप पूजन और गो- द्रव्य पूजन इस पर्व की विशेषताएँ हैं। इनसे तात्पर्य यह है कि धन की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी का अर्थात् अर्थ का सद्बुद्धि, ज्ञान, प्रकाश और पारमार्थिक कार्यों से विरोध नहीं होना चाहिए, वरन् अर्थ का सद्बुद्धि, ज्ञान, प्रकाश और पारमार्थिक कार्यों से विरोध नहीं होना चाहिए, वरन् अर्थ का उपयोग इनके लिए हो और अर्थोपार्जन भी इन्हीं से प्रेरित हो।
लक्ष्मी पूजन प्रारम्भ करने से पूर्व पूजा वेदी पर लक्ष्मी- गणेश के चित्र या मूर्ति, बहीखाता, कलम- दवात आदि भली प्रकार सजाकर रखने चाहिए तथा आवश्यक पूजा की सामग्री तैयार कर लेनी चाहिए। यों तो सभी पर्व सामूहिक रूप से मनाये जाते हैं, परन्तु पूजन के लिए किसी प्रतिनिधि को पूजा चौकी के पास बिठाना पड़ता है, इसी परिप्रेक्ष्य में पास बिठाये हुए प्रतिनिधि को षट्कर्म कराया जाए, अन्य उपस्थित परिजनों का सामूहिक सिंचन से भी काम चलाया जा सकता है। फिर सर्वदेव नमस्कार, स्वस्तिवाचन आदि क्रम सामान्य प्रकरण से पूरे कर लिये जाएँ। तत्पश्चात् श्रीगणेश एवं लक्ष्मी के आवाहन- पूजन प्रतिनिधि से कराए जाएँ।

॥ गणेश आवाहन॥

गणेश जी को विघ्ननाशक और बुद्धि- विवेक का देवता माना गया है। दीपावली पर गणेश पूजन से तात्पर्य यह है कि हम धन को खर्च करने और कमाने में बुद्धि- विवेक से काम लें। अविवेकी ढंग से बुद्धिहीनता के साथ उसे गलत ढंग से न तो अर्जन करें, न खर्च ही करें।

ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥

ॐ विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,
लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय,
गौरीसुताय गणनाथ! नमो नमस्ते॥
ॐ श्री गणेशाय नमः॥ आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

👉🏻॥ लक्ष्मी आवाहन॥
जिस तरह माता का पयपान हम जीवन धारण करने एवं भूख बुझाने के लिए करते हैं, उसी तरह धन आदि साधनों का सदुपयोग करें।

इसी तथ्य को हृदयंगम करने के लिए दीपावली पर महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। निम्न मन्त्र से माँ लक्ष्मी का भावभरा आवाहन करें-

ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे, विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥ – ल० गा०
ॐ आद्यन्तरहिते देवि, आद्यशक्ति महेश्वरि। योगजे योगसम्भूते, महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे, महाशक्ति महोदरे। महापापहरे देवि, महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
पद्मासनस्थिते देवि, परब्रह्म- स्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातः, महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
श्वेताम्बरधरे देवि, नानालङ्कारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातः, महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः। आवाहयामि स्थापयामि, ध्यायामि॥

पुरुष सूक्त (पृष्ठ ९६) से सभी आवाहित देवताओं का षोडशोपचार पूजन करें।

👉🏻॥ बहीखाते एवं कलम दवात का पूजन॥

बही, बजट बनाने एवं हिसाब रखने का साधन है, आय- व्यय को बताने वाली है। इसलिए दीपावली पर बही का पूजन किया जाता है। कलम- दवात भी हिसाब लिखने के काम में आते हैं। लक्ष्मी के अर्थात् धन के हिसाब- किताब में इनका उपयोग होने से इन सबकी भी पूजा की जाती है। नये वर्ष के लिए प्रयुक्त की जाने वाली बही तथा कलम- दवात का पूजन- विधिवत् निम्न मन्त्रों के साथ करें। पूजन करने के समय उन्हें, अक्षत, चन्दन, पुष्प, धूप, दीप आदि समर्पित करके प्रणाम करें।

👉🏻॥ बहीखाता पूजन॥

ॐ प्रसवे त ऽ उदीरते, तिस्रो वाचो मखस्युवः।
यदव्य एषि सानवि॥ – ऋ० ९.५०.२

॥ कलम- दवात/लैपटॉप पूजन॥

ॐ शिशुर्न जातोऽव चक्रदद्वने, स्व१र्यद्वाज्यरुषः सिषासति।
दिवो रेतसा सचते पयोवृधा, तमीमहे सुमती शर्म सप्रथः॥

॥ दीपदान॥

दीप, ज्ञान के- प्रकाश के प्रतीक हैं। ज्ञान और प्रकाश के वातावरण में ही लक्ष्मी बढ़ती है, फलती- फूलती है। अज्ञान और अन्धकार में वह नष्ट हो जाती है, इसलिए प्रकाश और ज्ञान के प्रतीक साधन दीप जलाये जाते हैं।
एक थाल में कम से कम ५ या ११ घृत- दीप जलाकर उसका निम्न मन्त्र से विधिवत् पूजन करें। तत्पश्चात् दीपावली के रूप में जितने चाहें, उतने दीप तेल से जलाकर विभिन्न स्थानों पर रखें।

ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा। सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा। अग्निर्वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्चः स्वाहा। सूर्यो वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्चः स्वाहा। ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा॥ ३.९

👉🏻॥ सङ्कल्प॥

सभी परिजनों से सङ्कल्प करवाया जाए। वही सङ्कल्प के पुष्पाक्षत पुष्पाञ्जलि मन्त्र बोलते हुए, पूजा की चौकी पर चढ़ाते हुए, क्रम समाप्त करें।
……………….. नामाहं महालक्ष्मीपूजनपर्वणि अर्थशक्तिं महालक्ष्मीप्रतीकं विज्ञाय अपव्ययादिदोषं दूरीकरणस्य संकल्पमहं करिष्ये॥

🙏🏻आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं🙏🏻