






चार राज्यों में चार विधानसभा व एक लोक सभा सीट के उप चुनाव हुए, जिसमें भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। विपक्ष इस बात से खुश था, मगर ये नतीजे तो तात्कालिक है। इनसे भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य की परिकल्पना बेमानी होगी। क्योंकि उप चुनाव में कांग्रेस ने तो केवल वही सीटें जीती है, जहां वो पहले से काबिज थी। दिखने में भाजपा को एक लोकसभा सीट व बिहार की विधानसभा सीट का नुकसान हुआ है।
पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट पर पहले भाजपा के बाबुल सुप्रियो जीते थे, मगर वे खुद ही भाजपा के नहीं रहे। जाहिर है, वो सीट व्यक्ति के प्रभाव की थी और उप चुनाव में भी वैसा ही नतीजा आया। क्योंकि इस बार भी टीएमसी प्रत्याशी व्यक्ति के रूप में बड़ा था। पहले भाजपा, फिर कांग्रेस की यात्रा करके फ़िल्म अभिनेता शत्रुघन सिन्हा टीएमसी तक पहुंचे थे। उनकी एक सफल अभिनेता की छवि है तो ज्यादा जोर नहीं पड़ा। दूसरे बंगाल में ममता दीदी तो ताबड़तोड़ विधानसभा चुनावों से जीत रही है।
आसनसोल पहले भाजपा के पास थी, क्यूंकि देश के श्रेष्ठ फुटबॉलर बाबुल सुप्रियो वहां से चुनाव जीते थे। वे भी अपनी व्यक्तिगत छवि के कारण दो बार जीतने में सफल रहे थे। इस तरह लोक सभा सीट के उप चुनाव का परिणाम तो व्यक्ति केंद्रित और बंगाल की ममता सरकार का प्रतिफल है। हालांकि, मुखर बोलने वाले शत्रुघन सिन्हा अब संसद में जरूर भाजपा के लिए समस्या खड़ी करेंगे। दूसरे ममता दीदी को कुछ अन्य राज्यों में टीएमसी के विस्तार के लिए एक बड़ा परिचित चेहरा मिल गया है। बंगाल की विधान सभा सीट तो पहले भी टीएमसी के पास ही थी, अब व्यक्ति भी बाबुल सुप्रियो जैसा जुड़ गया तो परिणाम पक्ष में आना ही था। भाजपा को बड़ा नुकसान सुप्रियो के टीएमसी में जाने का हुआ है, क्योंकि वो बंगाल में पार्टी का जाना पहचाना चेहरा थे।
अब बात बिहार की। यहां की विधानसभा सीट के उप चुनाव ने जरूर नये राजनीतिक समीकरणों के संकेत दिए हैं। भाजपा से ये सीट राजद ने छीनी है। मगर उसमें भी नीतीश की चुप्पी का असर रहा है। बिहार में भाजपा- जेडीयू गठबंधन की सरकार में सब ठीक नहीं है, इस बात को उप चुनाव के परिणाम ने स्पष्ट कर दिया। बिहार के छोटे दल कभी भी बड़ा उलटफेर कर सकते हैं, इसकी संभावना इस उप चुनाव से सामने आई है। मगर इसका भी भाजपा पर कम और नीतीश पर ज्यादा असर पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ की सीट पहले भी कांग्रेस के ही पास थी और महाराष्ट्र में भी यही कहानी थी। हालांकि भाजपा पर इन उप चुनाव की हार का कोई सीधा असर नहीं हुआ है मगर बंगाल और बिहार के लिए उसके लिए चिंतन का विषय जरूर है। क्योंकि भाजपा तो अभी से 2024 के आम चुनावों की तैयारी कर रही है, उस आधार पर उसे आंकलन करना पड़ेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



