






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 अप्रैल 2022। बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस ने अभी तक अपना गुरुर नहीं खोया था, इसी के चलते उसे हाल ही में हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त मिली। पंजाब की सत्ता भी हाथ से चली गई। भाजपा को एक बार फिर से कांग्रेस मुक्त भारत की आवाज बुलंद करने का अवसर मिल गया।
पार्टी के आला नेताओं में भी असंतोष गहरा गया। जी 23 जैसे समूह भी पार्टी के भीतर बन गए। कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी जैसे नेता खुलकर पार्टी नेतृत्त्व पर सवाल खड़े करने लगे। जाहिर है, राहुल गांधी और प्रियंका के अधिक सक्रिय होने की बात इन नेताओं को हजम नहीं हो रही थी। इनके दबाव के चलते ही राहुल को अध्यक्ष बनाने के स्थान पर कांग्रेस संगठन के चुनाव की घोषणा की गई। सोनिया गांधी जो अब तक कम सक्रिय होकर नेपथ्य में चली गयी थी, उसे सामने आना पड़ा। कमान संभालनी पड़ी। कमान सोनिया के हाथों में आते ही पार्टी के भीतर के गुट के तेवर भी हल्के हुए। उनको भी एक आस बंधी। क्योंकि सोनिया ने उनसे बात की। कुछ सुझावों को माना और साथ किया। अब सिब्बल या मनीष तिवारी सार्वजनिक रूप से नेतृत्त्व के खिलाफ बयान नहीं दे रहे हैं। जी 23 के नेताओं को कुछ हद तक शांत करने का काम सोनिया गांधी ने किया है।
सोनिया ने भी आते ही तीखे तेवर दिखाए। नवजोत सिद्धू सहित जिन राज्यों में पार्टी की हार हुई, वहां के अध्यक्षों से खुद इस्तीफा मांग लिया। इस तरह के निर्णय की उम्मीद पार्टी के नेताओं ने नहीं की थी। आठ साल से लगातार हार के कारण पार्टी का नेतृत्त्व बैकफुट पर था। मगर सोनिया ने नई शक्ति बन कांग्रेस के होने का सबूत दिया। पंजाब में युवा नेतृत्त्व को पार्टी की कमान देकर पार्टी के नेताओं को सोनिया ने परिवर्तन का संकेत दे दिया। पार्टी के भीतर रहकर विरोध के स्वर मुखरित करने वाले नेताओं को ये संदेश था। क्योंकि जी 23 के अधिकतर नेता उम्र के लिहाज से बड़े है, उनको ये संकेत देना काफी था।
अपने अड़ियल रुख को भी कांग्रेस ने छोड़ा, उसकी वजह भी सोनिया रही। प्रशांत किशोर के साथ सोनिया की लंबी बैठक हुई, जिसमें केवल 7 नेताओं को शामिल किया गया। पीके ने कांग्रेस को आने वाले चुनाव के लिए रणनीति बताई। सोनिया ने रोड मैप देखा और चिंतन के बाद निर्णय का कहा। एक सप्ताह में दूसरी बार पीके से बात की और अपने सुझावों के साथ नये प्लान पर सहमति दी। पीके ने पार्टी को अगले लोकसभा चुनाव में केवल 370 सीटों पर फोकस करने का कहा, जिस पर सहमति भी बनी।
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 52 सीटें जीती थी और 210 सीटों पर उसका नम्बर दूसरा रहा, जहां उसका भाजपा से सीधा मुकाबला था। 70 सीटों पर वो मामूली अंतर से तीसरे नम्बर पर रही थी। इनमें से 370 सीटों पर ही कांग्रेस अब ध्यान देगी। इस सहमति के बाद उसके सामने अन्य दलों से गठबंधन का भी रास्ता खुल गया है।
नये प्लान के अनुसार पार्टी तमिलनाडु, महाराष्ट्र और बंगाल में गठबंधन बना चुनाव में उतरेगी। इस साल के अंत में हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए भी अलग से प्लान बनाया गया है। सोनिया ने ताबड़तोड़ निर्णय लेने भी शुरू कर दिए हैं। इसी कारण 10 जनपथ एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। अर्से से पदों पर काबिज पुराने नेताओं के भीतर इससे हलचल होनी शुरू हो गयी है। सूत्रों की माने तो आने वाले दिनों में कांग्रेस कई राज्यों में नये और बड़े परिवर्तन करेगी, ताकि पार्टी की सूरत और सीरत, दोनों बदल जाये।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



