






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 अक्टूबर 2022। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में करोड़ो रूपये की 2 बीघा भूमि का फर्जी पट्टा बनवा लेने और उसमें से हिस्से काट कर महंगी दरों पर बेचने के मामले में आरोपियों द्वारा कई कमियां रह गई और वो पकड़ में आ गए है। पालिका प्रशासन द्वारा की गई आंतरिक जांच में यह गलतियां पकड़ ली गई और पट्टा फर्जी होना पाया गया। जिसके बाद अधिशासी अधिकारी द्वारा चार जनों के खिलाफ मुदकमा दर्ज करवाया गया है। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के पाठक भी नीचे दिए बिंदुओं में जाने की फर्जी पट्टा बनाने में आरोपियों ने क्या गलतियां की जिनसे वो पकड़े गए है।
01 – तौफीक पुत्र अब्दुल बहलिम द्वारा फर्जी पट्टा बना लेने और हिस्से कर बेचने की गुप्त सूचना पालिका को मिली थी जिसके बाद पालिका ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वर्तमान भूमि शाखा के प्रभारी से पट्टा के संबंध में रिकार्ड तलब किया गया। इस पर भूमि शाखा प्रभारी ने उक्त पट्टा से संबंधित रिकार्ड या कोई पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने तथा पट्टा रजिस्टर में भी ऐसा कोई पट्टा दर्ज नहीं होने की जानकारी दी।
02 – पालिका में पट्टे के सम्बंध में कोई कागजात नहीं मिलने पर पालिका ने तहसीलदार से इस पट्टे की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की गई तत्कालीन भूमि शाखा प्रभारी नरेश तेजी को कारण बताओ नोटिस दिया गया। लेकिन तेजी द्वारा अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया।
03- तहसीलदार से पट्टे की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद पट्टा व साईड प्लान का अवलोकन व विश्लेषण किया गया और उसमें साफ हो गया कि तौफीक द्वारा अन्य भू माफियाओं व नगरपालिका कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी पट्टा बनाना सामने आया।
04 – इस पट्टे के नाम से नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ में धारा 69क के तहत संधारित पट्टा रजिस्टर में कोई पट्टा दर्ज ही नहीं है।
05 – इस पट्टे में क्र.स. 46ए और दिनांक 15.11.2021 दिखाया हुआ है जबकि पट्टा रजिस्टर में क्र.सं. 46 पर श्रीमती रूकमणी/हीरालाल का नाम दर्ज है।
06- पट्टा बुक/रजिस्टर में तत्कालीन भूमि शाखा प्रभारी नरेश तेजी द्वारा पट्टा रजिस्टर क्र.सं. 32 व 35 रिक्त/खाली छोड़ी हुई मिली।
07- पट्टा धारी तौफीक के नाम से नगरपालिका कोष में कोई राशि जमा नहीं हुई है।
08- इस पट्टे में तो स्टाम्प ड्यूटी हेतु पट्टे के प्रतिफल राशि 501 रुपये लिखी हुई तो है लेकिन जबकि उक्त पट्टे के संलग्न कोई स्टाम्प आदि नहीं है। जबकि पालिका द्वारा जारी सभी पट्टो में 500 रुपये का स्टाम्प अधिशाषी अधिकारी/चैयरमैन हस्ताक्षरहित शुदा संलग्न होते हैं लेकिन इस पट्टे में ऐसा नहीं है।
9- इस पट्टे में दिखाई गई पड़ौस की सीमाएं,आसा पासा और पट्टे के साथ लगाए गए नक्शे में आसा पासा में पडोसियों के नाम भी बदले हुए है। बनाये गए पट्टे व उसकी फाइल में लगाये गए साईट प्लान में आसा पासा में अंकित व्यक्तियों के नामों में अन्तर सामने आया।
10- इस पट्टे के संलग्न नक्शे में केवल मात्र पालिका जेईएन भरत गौड़ और व नगरमित्र इंजीयनरिंग पाॅईन्ट के हस्ताक्षर है। जबकि नियमानुसार नक्शे पर पालिका ईओ/चैयरमैन के साइन होने होते हैं। इसमे इन दोनों जिम्मेदार ऑथोरिटी के हस्ताक्षर नहीं है।
11- इस पट्टे में अधिशाषी अधिकारी के हस्ताक्षर के नीचे दिनांक 09.11.2021 लिखी हुई है जब कि भूखण्ड का पट्टा दिनांक 15.11.2021 को बनाया गया है। इस प्रकार पट्टा जारी की दिनांको में भिन्नता है।
12- इस पट्टे में पट्टाधारी का पता बिग्गा बास वार्ड न. 16 लिखा हुआ है जबकि साईट प्लान में बिग्गाबास वार्ड न. 24 लिखा हुआ मिला है।
13- राजस्व विभाग द्वारा नगरपालिका को हस्तान्तरित भूमि खसरा न. 1067 में नगरपालिका द्वारा अब तक किसी कब्जाधारी का नियमन नहीं किया गया है। जबकि यह फर्जी पट्टा उसी भूमि के लिए बनवाया गया।
इन सभी कमियों और फेरबदल से पालिका ने पाया कि तौफीक ने पालिका कर्मियों के साथ मिल कर 4805.76 वर्गमीटर का पट्टा प्रारूप के काॅलम भरकर, पालिका की सील मोहर लगाकर दस्तावेज की कुटरचना कर फर्जी पट्टा तैयार किया है। साथ ही ईओ में मामले में शामिल नगरपालिका कर्मचारीयों द्वारा प्रशासन शहरों के संग अभियान में कार्यों की अधिकता/व्यस्तता/स्टाफ की कमी के चलते मौका पाकर फर्जी पट्टा बनाने और साइन करवा लेने का आरोप लगाया है।



