May 20, 2026
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यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधान सभा के चुनावों की तारीखों का ऐलान कल चुनाव आयोग ने किया। इस समय कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, उसके बीच चुनाव की प्रक्रिया पूरी करनी है और ये सभी के लिए बड़ा चैलेंज है।
चुनाव आयोग ने पहली बार ऑनलाइन नामांकन दाखिल करने का तरीका पहली बार अपनाया है। मगर नेताओं की रैलियां, सभाओं, बड़े जन सम्पर्क पर रोक लगा साहस भी दिखाया है। अब दलों और नेताओं के पास डिजिटल माध्यम से ही प्रचार करने का तरीका बचा है, ये उनको पहला अनुभव होगा। मगर मतदान कराने वालों की सुरक्षा बड़ी समस्या रहेगी। साथ ही, आयोग के आदेशों की अवहेलना न हो इस पर कड़ी नजर रखनी पड़ेगी। ये सबसे कठिन काम है।
दूसरा चैलेंज राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों के सामने होगा। क्योंकि अधिकतर नेता चुनाव के समय ही अपने मतदाता के पास जाते हैं। लुभाते हैं और बड़े बड़े वादे करते हैं। इसका अवसर नहीं मिलेगा। जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदि के जरिये भी सबने चुनाव प्रचार होते सदा देखा है और उसका चुनाव लड़ने वालों को लाभ भी मिलता है, वो लाभ इस बार सीमित रहेगा। क्योंकि सरेआम इन जरियों का उपयोग तो वैसे भी नियम विरुद्ध है। इन माध्यमों का उपयोग न होना लोकतंत्र के लिए ठीक है।
धन बल और बाहु बल हर चुनाव में बड़ी भूमिका निभाते हैं, ये बात जग जाहिर है, उस पर प्रत्यक्ष में तो अंकुश लगेगा ही। हां, सिद्धहस्त नेता अपने तरीके से इनका उपयोग कर जायेंगे, इसमें भी कोई शक नहीं। क्योंकि नियमों का तोड़ निकालने में नेता ही सक्षम है।
तीसरा चैलेंज मतदाता के लिए है। उसे महामारी से बचकर पूरी चुनाव प्रक्रिया में भागीदारी करनी है। मतदान कर अपनी पसंद की सरकार चुननी है। मतदाता ही तो सबसे पहले भ्रम में आता है, तभी नेता अपना खेल खेलता है। उसे इस चुनाव में ज्यादा सतर्क और होशियार रहना होगा। यदि इसमें वो सफल हो गया तो आने वाले चुनावों में वो नेताओं के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर देगा।
मगर बड़ा दायित्त्व चुनाव आयोग और मतदाताओं पर है। जिसके पास सत्ता है वो इस नये तरीके की व्यवस्थाओं में सत्ता का लाभ न ले, उसे रोकने की व्यवस्था होना जरूरी है। सरकारी तंत्र के बजाय ये काम मतदाता जागरूक होकर करेगा, तभी पार पड़ेगी। अन्यथा ये नया तरीका भी राजनीति की भेंट चढ़ जायेगा। इसलिए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव खासे महत्त्व के हैं, जिसमें लोकतंत्र की नई परीक्षा होगी और परिणाम ही लोकतंत्र का भविष्य तय करेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार