






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 जनवरी 2024। गांव माणकरासर में 20 जनवरी को करीब 2 दर्जन मोर सहित दो दर्जन से अधिक चिड़िया, कबूतर, कौए मौत का शिकार हो गए। वन विभाग को सूचना मिलने पर बीकानेर तक विभाग में हड़कंप मच गया। उप वन संरक्षक सहित स्थानीय अधिकारी भी एक्टिव हुए और बीकानेर व जयपुर से जांच दल गांव पहुंचे। मामले की कागजों में काले नीले अक्षरों के साथ विभाग ने इतिश्री कर ली। ग्रामीणों के किसी प्रश्न का उत्तर दिए बिना ही विभाग ने कार्रवाई की खानापूर्ति कर ली। पंछियों की मौत कैसे हुई.? और लगातार क्यों हो रही है.? ये प्रश्न गूंजते ही रह गए। जीव प्रेमी ग्रामीणों में घटना से रोष है। गत शनिवार की इस घटना के बाद रविवार को भी कुछ पंछी मरे पाए गए। उसके बाद भी करीब प्रतिदिन दो तीन पंछियों के मृत शव ग्रामीणों को नजर आ रहें है।
अतिथि पक्षियों पर छाया संकट, जीव प्रेमी चिंतित।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्रामीणों ने बताया कि इस मौसम में गांव में प्रवासी के रूप में हरे कबूतर बड़ी संख्या में आत है। गुरूवार को दो हरे कबूतर मृत मिले और दो घायल मिले। जीव प्रमियों ने वन विभाग को सूचना दी और विभाग ने आनन फानन में दोनों को गांव से रेसक्यू किया। गांव में रविवार को पुन: तीन हरे कबूतरों के मृत शव ओर बरामद हुए तो ग्रामीण चिंतित हो उठे है। गांव के जीव प्रेमी युवा तोलाराम भूकर ने बताया कि गांव में पंछियों की मौतों से ग्रामीण परेशान व चिंतित है कि आखिर इस तरह से पंछी क्यों मारे जा रहें है। ग्रामीण लगातार वन विभाग से पूरी व पुख्ता जांच की मांग कर रहें है।
वन विभाग बजा रहा पोल में ढोल, हरिण शिकार, वन कटाई, बेलगाम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रविवार को एक हरिण शिकार की घटना सामने आई परंतु जीव प्रमियों का कहना है कि लगातार क्षेत्र में व्यापक स्तर पर शिकार की घटनाएं हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न गांवो की रोही में धड़ल्ले से वृक्ष कटाई की नित नई शिकायतें प्राप्त हो रही है। ऐसे में वन विभाग की कार्यशैली के बारे में आमजन की राय यही है कि वन विभाग के अधिकारी व कार्मिक पोल में ढोल बजा रहें है और सरकारी नौकरी वाले चैन की बंसी बजा रहें है। जीव प्रेमी संस्था आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति के अध्यक्ष मनोज डागा ने बताया कि बेपरवाह विभाग को अनेकों बार शिकायतें की जाती है परंतु विभागीय ढूलमुल नीति से जीव प्रेमियों में नाराजगी है। उन्होंने कह कि क्षेत्र में वन कटाई चिंताजनक स्थिति तक पहुंच गई है। विभाग के पास संसाधनों की कमी और कमजोर ईच्छाशक्ति के कारण मामलों में प्रॉपर मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। लूणकरणसर रेंजर को यहां अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है। जिससे भी कार्य प्रभावित हो रहा है। समिति द्वारा पार्टी बनकर पूर्व में भी अज्ञात के खिलाफ 6 मामले दर्ज करवाए गए है।





