


श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 सितंबर 2026। नगरपालिका चुनाव-2026 में नामांकन का दौर खत्म होते ही अब चुनावी मैदान पूरी तरह सज चुका है। अंतिम दिन 234 पर्चे दाखिल होने के साथ ही प्रत्याशियों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। अब मुकाबला टिकटों से निकलकर मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंचने वाला है। कौन सा चेहरा कितना प्रभाव छोड़ता है और किस समाज का वोट किस दिशा में जाता है, आने वाले दिनों में यही चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा विषय रहने वाला है।
इस बीच भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण का सामाजिक गणित भी खासा दिलचस्प नजर आ रहा है। यहां भाजपा ने सबसे ज्यादा भरोसा ब्राह्मण समाज पर जताया है व 9 ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस की सूची में 8 ब्राह्मण चेहरो के साथ 5 प्रजापत चेहरों को शामिल कर यह गठजोड़ किया गया हैं। दोनों ही दलों ने माहेश्वरी समाज को भी महत्व दिया है व भाजपा ने 4 तो कांग्रेस ने 3 माहेश्वरी प्रत्याशी बनाये है। कांग्रेस का यह सामाजिक गठजोड़ व दोनों पार्टियों में टिकट वितरण में जातीय समीकरणों को साधने के प्रयास ही अब चुनावी विश्लेषण में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।
भाजपा का टिकट गणित—ब्राह्मण सबसे आगे, सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर 3 मुस्लिम चेहरे भी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भाजपा ने कुल टिकटों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 9 ब्राह्मण प्रत्याशियों को दी है। इसके बाद 4 टिकट माहेश्वरी समाज को मिले हैं। पार्टी ने सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पकड़ते हुए कांग्रेस के बराबर मुस्लिम समाज के 3 टिकट दिए है। एससी वर्ग में भाजपा ने नायक समाज से 3 उम्मीदवार बनाये है व मेघवाल जाति से एक को भी मौका नहीं दिया गया है। इसके अलावा जाट, जैन, नाई, गुसाईं और राजपुरोहित समाज से 2-2 प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है।
भाजपा की सूची में वाल्मिकी, राजपूत, प्रजापत, मदान/सिंधी, सुनार, गुर्जर, सिद्ध, दर्जी, स्वामी, सुथार और माली समाज से एक-एक प्रत्याशी मैदान में हैं।
कांग्रेस का गणित—ब्राह्मण-प्रजापत गठजोड़ के साथ एससी वर्ग में मेघवाल-वाल्मीकि को साधा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कांग्रेस ने भी सबसे ज्यादा 8 टिकट ब्राह्मण समाज को दिए हैं। लेकिन टिकट वितरण की रणनीति भाजपा से अलग दिखाई देती है। कांग्रेस ने 5 प्रजापत प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इसके बाद 4 माहेश्वरी, 4 जाट मैदान में उतारे है। जैन समाज को टिकट देने में भी कांग्रेस भाजपा से आगे रही है व 3 जैन, 3 मुस्लिम समाज के प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। कांग्रेस की सूची में एससी वर्ग की 4 सीटों में वाल्मिकी और मेघवाल दोनों को साधते हुए दोनों समाज से 2-2 टिकटें दी गई है। वही भाजपा ने आबादी में कम माने जाने वाले नायक समाज को तीन व वाल्मीकि समाज को केवल एक ही टिकट दी है। कांग्रेस द्वारा माली और नाई समाज से भी 2-2 प्रत्याशी शामिल हैं। वहीं दर्जी, राजपूत, सुथार, भार्गव, सुनार और स्वामी समाज से एक-एक प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा गया है।
एससी सीटों पर भी अलग-अलग गणित, लगाए विपरित दांव।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नगरपालिका चुनाव-2026 में टिकट वितरण के सामाजिक समीकरणों में एससी सीटों का गणित भी खासा दिलचस्प नजर आ रहा है। दोनों प्रमुख दलों ने आरक्षित चार एससी सीटों पर प्रत्याशी चयन में अलग-अलग रणनीति अपनाई है। कांग्रेस ने जहां मेघवाल और वाल्मीकि समाज के बीच 2-2 सीटों का बराबर का बंटवारा किया है, वहीं भाजपा ने आबादी में कम माने जाने वाले नायक समाज को प्राथमिकता देते हुए तीन टिकट दिए हैं और केवल एक टिकट वाल्मीकि समाज को दी है। एससी सीटों पर कांग्रेस के टिकट वितरण को देखें तो पार्टी ने 2-2 का संतुलन साधने की कोशिश की है। वहीं भाजपा के टिकट वितरण में नायक समाज को स्पष्ट रूप से अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। चार एससी वार्डों में कांग्रेस और भाजपा ने जिस तरह अलग-अलग सामाजिक समीकरण साधे हैं, उससे इन वार्डों में मुकाबला और रोचक हो गया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस का मेघवाल-वाल्मीकि संतुलन भारी पड़ता है या भाजपा का नायक समाज पर भरोसा चुनावी बढ़त में बदलता है।
टिकटों का गणित बनाम वोटों का गणित
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। टिकिट वितरण के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि टिकटों का यह सामाजिक गणित क्या वोटों के गणित में भी बदल पाएगा? राजनीतिक जानकारों की नजर में टिकट वितरण किसी भी चुनाव में दलों की रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत देता है, लेकिन नगरपालिका चुनाव केवल समाज के आंकड़ों से नहीं जीता जाता। वार्ड का स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, परिवार और समर्थकों का प्रभाव, पार्टी की संगठनात्मक ताकत तथा पिछले चुनावों का प्रदर्शन भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
अब टिकट नहीं, ‘टिकट का असर’ होगा असली मुद्दा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नामांकन पूरा होने के साथ ही अब चुनावी चर्चा का केंद्र बदल गया है। कौन किस समाज से है, यह चर्चा टिकट वितरण तक थी; अब सवाल होगा कि किस प्रत्याशी की अपने वार्ड में कितनी पकड़ है?
किसके पक्ष में परंपरागत वोटर मजबूती से खड़ा होगा और कहां टिकट का गणित सीधे जीत के गणित में बदल सकता है? और वार्डवासियों की इच्छा के विपरीत जबरन लादे गए टिकट वार्डवासी कैसे वापस लौटाते है। इन सवालों के जवाब आने वाले चुनावी दिनों में तस्वीर को और दिलचस्प बनाएंगे।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स नगरपालिका चुनाव-2026 में वार्डवार समीकरण, प्रत्याशियों की ताकत, सामाजिक गणित और चुनावी रणनीति की तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक पड़ताल लगातार आपके सामने रखेगा।




