






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 मार्च 2024। श्रीडूंगरगढ़ उपखंड 2001 से पूर्व शेखावाटी के चूरू से जुड़ा रहा है और शेखावाटी के प्रसिद्ध लोकनृत्य घींदड़ की यहां के गांव गांव में रचा बसा है। गांव मोमासर, उदरासर, रीड़ी, ठुकरियासर, श्रीडूंगरगढ़ सहित विभिन्न गांवो में चंग व घींदड़ के आयोजन होते है। चंग टोली में पुरूष सदस्यों के साथ एक या दो पुरूष ही स्त्रीवेश में नृत्य करते है। खूब धमाल गाई जाती है और परंपरागत इस गायन व नृत्य का उत्साह आनंद आज भी वही है जो सोशल मीडियो के आगमन से पहले से था। ग्रामीण उल्लास के साथ आनंदित होकर झूमते है और भाग लेते है। घींदड़ में युवक विभिन्न प्रकार के वेश धारण कर हंसी मजाक के साथ नाचते गाते उत्सव मनाते है।
70 साल से जारी है घींदड़ परंपरा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। होली के त्योहार पर सर्वाधिक रौनक होती है क्षेत्र के गांव मोमासर में, यहां गांव का हर एक ग्रामीण सभी भेदभाव भूलाकर सर्व समाज के कलाकार सौहार्द के साथ घींदड़ नृत्य में भाग लेते है। म्हाने मोमाणे री घींदड़ प्यारी लाग रै.. गीत पर ग्रामीण खूब झूमते है। गांव के विद्याधर शर्मा ने बताया कि यह परंपरा गांव करीब 70 वर्षों से अनवरत चल रही है। यह तब प्रारंभ हुई जब गांव में साधनों का नितांत ही अभाव था और आज भी यह अपने मूल स्वरूप में जींवत है। गांव में घींदड़ के संस्थापक सदस्य कलाकार मोहनराम नाई सहित कुछ कलाकारों ने इसे प्रारंभ किया था। आज घींदड़ आयोजन कमेटी द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया जाता है। ढोल नगाड़ो की थाप पर कलाकार रातभर नृत्य करते है। गांव के पवन सैनी ने बताया कि युवा मेहरी, शिव पार्वती, सेठ सेठानी या कोई अन्य भांति भांति प्रकार के स्वांग धरते है। कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित चौक पर बारस से आयोजन प्रारंभ होता है। होली से एक दिन पहले चंग प्रतियोगिता का आयोजन होता है जो इस बार 23 मार्च को होगा। इसमें विजेता व उपविजेता टीमों को नगद पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाता है। गांव के जानकार बुजुर्ग निर्णायक की भूमिका निभाते है। उपसरपंच व आयोजक कमेटी सदस्य जुगराज संचेती ने बताया कि इस दौरान गांव के प्रवासी भी मोमासर लौट आते है और अपने गांव की इस समृद्ध परंपरा में भाग लेते है। जनप्रतिनिधि व प्रशासन के लोग ही नहीं घींदड़ देखने गांव में दूर दूर से दर्शक आते है। अनेक बड़े नेताओं ने भी इसे खूब सराहा है। सुरवि चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजक कमेटी के सदस्य आयोजन व्यवस्थाओं में पूरी निष्ठा से भागीदारी निभाते है। जयपुर विरासत फाउंडेशन के निदेशक विनोद जोशी ने बताया कि गांव मोमासर प्राचीनतम गांव है और यहां सांस्कृतिक धरोहर अत्यंत समृद्ध है। घींदड़ का आयोजन राजस्थान की पुरातन संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक अनूठा प्रयास है।
गांव में की विशेष सजावट, नगाड़ो के साथ प्रारंभ, 24 को होगा पूर्ण।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रंग एकादशी के बाद बारस को नगाड़ो के पूजन के साथ आयोजन प्रारंभ हो गया है। मुख्य चौक को रंग बिरंगी रोशनियों सहित विभिन्न सजावटी सामानों से भी आयोजन स्थल को सजाया गया है। उपसरपंच जुगराज संचेती ने बताया कि भव्य आयोजन 22 मार्च से प्रारंभ होकर 24 मार्च तक जारी रहेगा। विभिन्न स्वांग रचकर रसिए रात 9 बजे से परंपरागत घींदड़ में भाग लेंगे। 23 मार्च को चंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ध्यान रहें घींदड़ समारोह के विशेष आर्कषक कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के फेसबुक पेज पर किया जा रहा है। आप सभी लाइव भी इसे पेज पर देख सकते है।
युवाओं को मिल रही नई पहचान भी, हो रहा सम्मान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चंग की टोलियों में शामिल युवा होली के अवसर पर दूर दूर अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए जा रहें है। दिल्ली, मुंबई ही नहीं दूर दराज के शहरों में प्रवासियों द्वारा चंग के आयोजन किए जा रहें है। इन कार्यक्रमों में क्षेत्र से चंग टोलियों को बुलाया जा रहा है। वहां इनका खूब मान सम्मान के साथ उपहार भी दिए जा रहें है जिससे युवा टोलियों को नई पहचान भी मिल रही है। अनेक टोलियों के लिए होली पर ये रोजगार का अवसर भी है जिससे चंग धमाल के साथ समृद्धि भी जुड़ रही है।



