






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 जून 2021। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सैंकड़ो ऐसे परिवार है जो डूंगर कॉलेज बीकानेर के अस्सिटेंट प्रोफेसर श्यामसुंदर ज्याणी के हाथों से लिए हुए पौधे को परिवार के सदस्य के रूप में पाल पोस कर पेड़ बना चुके है। आज भारत का गौरव बने ज्याणी की पहचान राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय बनने के साथ ही उनके पारिवारिक वानिकी के विचार को दुनिया ने स्वीकार किया है। ज्याणी को आज प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान “लैंड फ़ॉर लाइफ” के लिए चुन लिया गया है। उनके प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है और वे ज्याणी को शुभकामनाएं दे रहे है। बता देवें इस पुरस्कार हेतु दुनियाभर से 12 लोगों को फाइनलिस्ट घोषित किया गया जिसमें भारत से रैली फ़ॉर रिवर के लिए ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु का नाम भी शामिल था। युएनडीसी ने आज कोस्टारिका में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में विजेता के रूप में ज्याणी के नाम की घोषणा की गई तो भारत सहित बीकानेर ही नहीं श्रीडूंगरगढ़ में भी उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। ज्याणी ने इस पर कहा कि एक धरतीपुत्र को धरती के संरक्षण के लिए धरती के सबसे बड़े संगठन द्वारा सर्वोच्च पुरस्कार दिया जाना सुखद अनुभव है। बता देवें ज्याणी ने पिछले 18 सालों में गांव-गांव, ढाणी-ढाणी पारिवारिक वानिकी के विचार को पहुंचा कर एक हरित जन आंदोलन खड़ा कर दिया है। ज्याणी को इस पुरस्कार से आगामी अगस्त में चीन में आयोजित होने वाले कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज में नवाजा जाएगा जहां 195 देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। उन्होंने परिवार सहित सभी सहयोगियों का आभार प्रकट किया।



