






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 जनवरी 2026। श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 18-Jan-2026
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि अमावस्या 01:24 AM
🔅 नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 10:15 AM
🔅 करण चतुष्पाद, नाग 12:48 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग हर्शण 09:10 PM
🔅 वार रविवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:26 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि धनु 04:41 PM
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 06:02 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:33 PM
🔅 ऋतु शिशिर
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:35:50
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत पौष
🔅 मास पूर्णिमांत माघ
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:23 PM 01:05 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:37 PM 05:19 PM
🔅 कंटक 10:58 AM 11:40 AM
🔅 यमघण्ट 01:48 PM 02:30 PM
🔅 राहु काल 04:42 PM 06:02 PM
🔅 कुलिक 04:37 PM 05:19 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 12:23 PM 01:05 PM
🔅 यमगण्ड 12:44 PM 02:03 PM
🔅 गुलिक काल 03:23 PM 04:42 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 उद्वेग 07:26 AM – 08:45 AM
🔅 चल 08:45 AM – 10:05 AM
🔅 लाभ 10:05 AM – 11:24 AM
🔅 अमृत 11:24 AM – 12:44 PM
🔅 काल 12:44 PM – 02:03 PM
🔅 शुभ 02:03 PM – 03:23 PM
🔅 रोग 03:23 PM – 04:42 PM
🔅 उद्वेग 04:42 PM – 06:02 PM
🔅 शुभ 06:02 PM – 07:42 PM
🔅 अमृत 07:42 PM – 09:23 PM
🔅 चल 09:23 PM – 11:03 PM
🔅 रोग 11:03 PM – 00:44 AM
🔅 काल 00:44 AM – 02:24 AM
🔅 लाभ 02:24 AM – 04:05 AM
🔅 उद्वेग 04:05 AM – 05:45 AM
🔅 शुभ 05:45 AM – 07:26 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 मकर चर
शुरू: 07:15 AM समाप्त: 08:56 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 08:56 AM समाप्त: 10:26 AM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:26 AM समाप्त: 11:52 AM
🔅 मेष चर
शुरू: 11:52 AM समाप्त: 01:28 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 01:28 PM समाप्त: 03:24 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:24 PM समाप्त: 05:39 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 05:39 PM समाप्त: 08:00 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 08:00 PM समाप्त: 10:17 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 10:17 PM समाप्त: 00:33 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 00:33 AM समाप्त: 02:52 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 02:52 AM समाप्त: 05:11 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 05:11 AM समाप्त: 07:15 AM
🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺
दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है
🌼 पौष अमावस्या ( मौनी अमावस्या ) 2026
हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का महत्त्व,बहुत अधिक बताया गया है। माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता हैं। इस दिन स्नान से पूर्व मौन रहकर गंगा / यमुना / सरयू / गोदावरी किसी पवित्र नदी , जलाशय अथवा घर में जल में तिल और गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए।
माघ मास की अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही तिथियाँ पर्व कही गयी हैं। लेकिन माघ मास के स्नान का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण पर्व मौनी अमावस्या के स्नान का माना गया है,
माघ मास को भी कार्तिक मास के समान पुण्य मास कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार सागर मंथन से धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उस अमृत कलश को प्राप्त करने के लिए देवों व असुरों के बीच हुई खींचातानी से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर प्रयाग, हरिद्वार नासिक व उज्जैन में जा गिरि थी। इसी लिए इन स्थानों पर कुंभ का पर्व मनाया जाता है।
इसमें प्रयाग में लगने वाले कुम्भ में सवसे श्रेष्ठ स्नान माघी अमावस्या / मौनी अमावस्या, का ही कहा गया है।
मान्यतानुसार माघ में पड़ने वाली मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम तीर्थ में तैंतीस कोटी देवताओं का निवास होता है इसलिए माघ अमावस्या पर संगम में स्नान से अमृत स्नान का पुण्य मिलता है।
एक मान्यता ऐसी भी है कि इस दिन मनु ऋषि का भी जन्म हुआ था जिसके कारण भी इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन किये गए उपाय अति शीघ्र सफल होते है और मौनी अमावस्या के दिन तो इन उपायों का और भी महत्त्व है।
मौनी अमावस्या के दिन पितरो के निमित एक ब्राह्मण को अपने घर में भोजन कराएं। इससे पितृ प्रसन्न होते है, जीवन के सभी संकट दूर होते है, पितरो के शुभाशीष से जातक को किसी भी चीज़ का आभाव नहीं होता है।
मौनी अमावस्या के दिन शिव परिवार, माँ लक्ष्मी जी को चावल की खीर का भोग लगाने से धन-सम्पत्ति के भण्डार भरते है। खीर पितरो को भी अति प्रिय है अत: इस दिन पितरो के निमित भी इस खीर को किसी दोने में डालकर पीपल के वृक्ष के नीचे अवश्य ही रखवाएं
मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन किसी भूखे को भोजन कराने से जो पुण्य मिलता है वह पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय होता है, अत: इस दिन किसी भूखे को भोजन अवश्य ही करवाएं या किसी गरीब असहाय की मदद अवश्य करें।
अगर किसी जातक को बहुत मानसिक परेशानियाँ रहती है तो वह मौनी अमावस्या के दिन दूध में अपनी छाया देखकर उस दूध को किसी दोने में डालकर काले कुत्ते को पिलाएं। इससे सभी तरह की मानसिक परेशानियां अवश्य ही दूर होती है।
मौनी अमावस्या के दिन 4 चुटकी सूखा नील बहते हुए पानी में ॐ रां राहवे नमः मंत्र का 21 बार जाप करते हुए बहा दे, ऐसा करने से राहु के अशुभ फल दूर होते है, अनुकूल फल मिलने लगते है।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री



