






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 16 अक्टूबर 2025। दीपावली दीपक की है, झालरों की नहीं, ये पुकार क्षेत्र के वे परिवार कर रहें है, जो क्षेत्रवासियों की दीपावली रोशन करने के लिए दीपक बनाने में जुटें है। इन परिवारों के पुरूष सदस्य दीपक बना रहें है और महिलाएं और बच्चे इन्हें सुखाने व पकाने का काम कर रहें है। श्रीडूंगरगढ़ शहर के किशोर प्रजापत, पूनमचंद प्रजापत, भूराराम प्रजापत, शंकरलाल, किशोरीलाल व नरसी प्रजापत के परिवार तन ही नहीं मन से अपने हाथों से दुआएं दीपक के रूप में गढ़ रहें है। किशोर ने बताया कि झालरों ने दीपक की खरीददारी को कम कर दिया है। उन्होंने सभी नागरिकों से दीपावली पर अपने घर में मिट्टी के दीपक जलाकर रोशन करने की अपील करते हुए कहा कहा कि दीपावली दीपक की है, इन झालरों की नहीं। किशोर ने बताया कि वे तीन पीढ़ी से दीपक बना रहें है। कई घरों में चाक लगे है और बच्चों को ये काम आता है, पर इस काम में अब आमदनी नहीं होने से वे अन्य कामों में लगे है।
चार दिन लगाएंगे बाजार में दुकानें, दीपक महंगे नहीं मिट्टी हुई मंहगी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। किशोर ने बताया कि वे बारस के दिन से दीपावली तक चार दिन बाजार में दुकान लगाएंगे। 20 रूपए के 10 दीपक देंगे और चार दिनों में उन्हें अपने घर बनाए करीब दस हजार से अधिक दीपक बेचने का प्रयास करना है। परिवार ने बताया कि बरसात का दौर थमने के बाद से ही वे काम शुरू कर देते है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के भाव 40 से 45 प्रतिशत तक बढ़ गए है ऐसे में हाथ से दीपक बनाना, न्याई में उन्हें पकाना, मेहनत को जोड़ देवें तो कीमत कुछ भी नहीं है। परिवार ने बताया कि वे कोलायत, लखासर, गुसाईंसर बड़ा से मिट्टी मंगवाते है। वे 1500 रूपए में ऊंट गाडे वाले को देकर या कोलायत से 600 रूपए क्विटंल मिट्टी मंगवाते है। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा तक दीपक की बिक्री होती है। उसके बाद वे अगली गर्मी के लिए मटकी बनाने व पकाने के काम में जुट जाते है।
पार्षद प्रतिनिधि नानूराम कुचेरिया ने भी इन परिवारों के साथ क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि मिट्टी के दीपक ही शास्त्र सम्मत होने के साथ शुभता का प्रतीक है। ये रोशनी के साथ सुख व समृद्धि वृद्धि के कारक है, इसलिए क्षेत्रवासी अपने घरों को दीपोत्सव पर्व पर झालरों के स्थान पर दीपक से रोशन करें।







