






नया साल 2025 आने को है और आप श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के साथ पढ़ रहें है हमारे क्षेत्र से हौसले की एक नई कहानी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 दिसबंर 2024। किसी ने ठीक ही कहा है, “मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।” ये साबित कर दिया है श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के गांव सांवतसर के 27 वर्षीय ओमप्रकाश ने, बीकानेर के सार्दुल स्पोर्टस स्कूल के ग्राउंड में आयोजित 14वीं राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ओमप्रकाश ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड जीत लिया है। उनका सलेक्शन अब राष्ट्रीय स्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के हो गया है। ओमप्रकाश प्रसन्न है और नेशनल में भाग लेते हुए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की बात कह रहें है। कोच रामावतार सैन के निर्देशन में उसने डिस्कस थ्रो खेलना प्रारंभ किया और ये मुकाम हासिल किया है। सैन ने बताया कि डिस्कस थ्रो के खेल में राज्य भर से 31 दिव्यांग खिलाड़ी शामिल हुए। इनमें ओमप्रकाश ने 25 मीटर डिस्कस फैंक कर गोल्ड जीत लिया है। उनमें गजब की जीवटता है उन्हें परिवार व समाज का सहयोग मिला तो वे नेशनल में भी गोल्ड ला सकेंगे। गोल्ड जीतने पर जानकार व परिजन उन्हें बधाई देते हुए उनका हौसला बढ़ा रहें है। विदित रहें इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता का समापन आज होगा। इसमें शुक्रवार को ओमप्रकाश ने गोल्ड जीता और शनिवार को क्षेत्र के गांव जोधासर के मांगूसिंह ने सिल्वर जीता है।
2020 में गवांए दोनों पैर, बड़े है सपने।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र के एक गांव सांवतसर में महज 23 वर्ष की उम्र में जीएसएस पर ठेकेदार के कार्मिक के रूप में काम करने वाले युवक ओमप्रकाश, अचानक हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया। चिकित्सा सुविधाओं ने उसके प्राण तो बचा लिए पर दोनों पैर दुर्घटना में गवां दिए। घर में युवा पुत्र को दिव्यांग होते देख माता पिता का कलेजा भी बार बार रो पड़ता। ओमप्रकाश के टूटे मन की सिलाई में दो वर्ष लग गए। ओमप्रकाश ने हौसला नहीं खोया और जीवन के पथ पर संघर्ष के मार्ग को अपनाते हुए बिना पैर वह आगे बढ़ने लगा। उसने अपनी शिक्षा व खेल पर ध्यान देना प्रारंभ कर दिया। पिता बुधराम विश्नोई सहित परिवार को साथ मिला। बीए की शिक्षा प्रारंभ की आज वह बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। ओमप्रकाश ने बताया कि उसका किसान परिवार है और भाई बहन व परिवार भी उसका पूरा साथ दे रहें है। ओमप्रकाश ने कहा कि वे खेल में अपने गांव का ही नहीं मौका मिला तो देश का नाम रोशन करना चाहते है। इसके साथ ही वे पढ़ लिखकर भी जीवन में कुछ बनना चाहते है।





