May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 8 जुलाई 2022। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज फैल रहा है। पशुपालक सावधान हो जाएं व गौवंश में फैल रहें इस वायरस के प्रति जागरूक रहकर समय रहते इलाज करवाएं। इस बीमारी के कारण गांव बाना की श्रीबांके बिहारी गौशाला समिति में पशुओं की मौत भी हो गई है। आज कालूबास की कृष्ण गौशाला में भी 2 गांए इस डिजीज से पीड़ित मिली है। वहीं कालूबास में एक घर में भी एक गाय इस बीमारी से ग्रस्त हुई है। चिकित्सा विभाग अर्लट हो गया है और डॉ दीनू खां के सुपरविजन में जांच व ईलाज प्रारंभ कर किया गया है।

पूरा क्षेत्र पशु पालक प्रधान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ पूरा क्षेत्र कृषि प्रधान है परंतु बरसात की अनिश्चितता के कारण प्रायः सभी किसान घरों में कृषि के साथ पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। अब क्षेत्र के पशुपालकों की चिंताएं बढ़ गई है। लंपी स्किन डिजीज संक्रमण से ग्रस्त गौवंश सामने आने लगे है। क्षेत्र में ये वायरस फैलने की आंशकाएं बढ़ गई है।
गांव बाना की गौशाला में गोवंश आया चपेट में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बाना में श्रीबांके बिहारी गौशाला समिति में लंपी स्किन डिजीज से ग्रस्त गौवंश बड़ी संख्या में सामने आया है। ब्लाक पशु चिकित्सा प्रभारी उत्तम सिंह भाटी ने तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम में डॉ दीनू खां प्रभारी लखासर, श्रीभगवानाराम प्रभारी रिड़ी, बाबूलाल प्रभारी दुसारणा होंगे। टीम को प्रतिदिन गौशाला बाना पर निगरानी रखने व चिकित्सा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए है। भाटी ने कहा कि गौशाला प्रबंधक के साथ एक बैठक कर इस बीमारी के लक्षण, उपचार व बचाव की जानकारी भी दी जाएगी।

ये है लक्षण।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पशु चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बीमारी के लक्षणों में गौवंश को बुखार आना, नाक से लार गिरना और शरीर में गांठे में पड़ना है। अगर किसी पशु पालक को ये लक्षण अपने पशु में नजर आए तो वे तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। डॉ. दीनू खां ने बताया कि जहां भी पीड़ित गाय की सूचना मिल रही है उनका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर ने बताया कि इसके ट्रीटमेंट का असर तीन दिन में आने लगता है तो समय रहते इलाज प्रारंभ हो जाए तो गौवंश स्वस्थ हो सकते है।

क्या है लंपी स्किन डिजीज.?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डॉ. दीनू खां ने बताया कि ये गोवंश में त्वचा संबंधी रोग है और इससे लगातार अस्वस्थ रहने पर यह मौत का कारण भी बन जाती है। यह एक वायरल बीमारी है और इसमें मृत्युदर कम है परंतु पशुओं को रिकवर होने में करीब एक महीने से अधिक का समय लग जाता है। लंपी स्किन डिजीज नामक यह बीमारी दुघारू पशुओं को शीघ्र अपना शिकार बनाती है जिससे पशुओं के शरीर पर गांठे हो जाती है और वह पशु दूध देना बंद कर देता है। पशु को बुखार आता है और खाना पीना बंद कर देते है। पशु के शरीर पर गोलाकार आकृति के छल्ले हो जाते है।