






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 नवंबर 2024।
🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 01 – Nov – 2024
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या 06:18 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति +03:31 AM
🔅 करण नाग 06:18 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग प्रीति 10:39 AM
🔅 वार शुक्रवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:45 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 05:49 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:33 PM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 11:03 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:55:16 – 12:39:30
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:58 AM – 09:42 AM
🔅 कंटक 01:23 PM – 02:07 PM
🔅 यमघण्ट 04:20 PM – 05:04 PM
🔅 राहु काल 10:54 AM – 12:17 PM
🔅 कुलिक 08:58 AM – 09:42 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:52 PM – 03:36 PM
🔅 यमगण्ड 03:03 PM – 04:26 PM
🔅 गुलिक काल 08:08 AM – 09:31 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
📜 चोघडिया 📜
🔅चल 06:45:34 – 08:08:32
🔅लाभ 08:08:32 – 09:31:29
🔅अमृत 09:31:29 – 10:54:26
🔅काल 10:54:26 – 12:17:23
🔅शुभ 12:17:23 – 13:40:20
🔅रोग 13:40:20 – 15:03:17
🔅उद्वेग 15:03:17 – 16:26:14
🔅चल 16:26:14 – 17:49:11
🔅रोग 17:49:12 – 19:26:20
🔅काल 19:26:20 – 21:03:28
🔅लाभ 21:03:28 – 22:40:36
🔅उद्वेग 22:40:36 – 24:17:44
🔅शुभ 24:17:44 – 25:54:52
🔅अमृत 25:54:52 – 27:32:00
🔅चल 27:32:00 – 29:09:08
🔅रोग 29:09:08 – 30:46:16
❄️ लग्न तालिका ❄️
🔅 तुला चर
शुरू: 05:39 AM समाप्त: 07:58 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:58 AM समाप्त: 10:17 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:17 AM समाप्त: 12:22 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 12:22 PM समाप्त: 02:05 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:05 PM समाप्त: 03:33 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:33 PM समाप्त: 04:59 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 04:59 PM समाप्त: 06:35 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:35 PM समाप्त: 08:31 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:31 PM समाप्त: 10:46 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 10:46 PM समाप्त: अगले दिन 01:06 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:06 AM समाप्त: अगले दिन 03:23 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:23 AM समाप्त: अगले दिन 05:39 AM
☘️ दीपावली की पावन पार्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ☘️
दिवाली के दिन लक्ष्मी – गणेश जी, कुबेर देव और देवराज इंद्र की पूजा करना अत्यंत फलदाई है । मान्यता है कि दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त विशेषकर प्रदोष काल में लक्ष्मी – गणेश जी की पूजा करने से पूरे वर्ष सुख – सौभाग्य की प्राप्ति होती है, धन का आगमन लगातार बना रहता है ।
पूजन के समय गृह स्वामी हलके पीले, केसरी और स्त्री लाल या पीली साड़ी और घर के बाकि सदस्य भी हलके कपडे पहन कर ही पूजा में बैठे ।
दिवाली पूजा में विशेष रूप से माँ लक्ष्मी की आराधना की जाती है। माता लक्ष्मी का दूसरा नाम कमला है, यह विष्णु प्रिय भी कही गयी है । यह कमल के आसन पर हाथ में कमल को धारण किये हुए विराजमान है। लक्ष्मी जी दीपावली के दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी ।
इस दिन घर एवं व्यापारिक प्रतिष्टान के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीवार पर शुभ – लाभ , स्वास्तिक , ॐ , आदि सौभाग्य चिन्हों को सिंदूर से अंकित करें तत्पश्चात उस पर पुष्प रोली चड़ाकर प्रार्थना करनी चाहिए ।
दिवाली पूजन का पूजन घर के पूजा कक्ष में अथवा तिजोरी रखने वाले कक्ष में करना उत्तम होता है ।
दिवाली पूजन में कमल गट्टा, पीली सरसों, शहद, साबुत धनिया, पीली कौडिय़ां, गोमती चक्र, नाग केसर, साबुत हल्दी की गांठ, कमल का फूल आदि का अवश्य प्रयोग करें I
लक्ष्मी गणेश, कुबेर जी की पूजा के साथ साथ, यदि घर में स्फुटिक श्री यंत्र, दक्षिण वर्ती शंख, नौ ग्रह यंत्र और यदि कोई अन्य भी यंत्र हो उनकी भी अवश्य ही पूजा करें ।
दीवाली के दिन बही खाता, तुला आदि की भी अवश्य जी पूजा करनी चाहिए । दीपावली की पूजा के बाद पूरे घर के कोने कोने को दीपको के प्रकाश से प्रकाशित करना चाहिए । दीपावली की पूजा में घर के मंदिर में एक दिया ऐसा जलाये जो सारी रात जलाता रहे ।
🌷महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त 🌷
लाभ और अमृत वेला :- 08:08 am – 10:57 am
वृश्चिक लग्न :- 07:58 am – 10:17 am
अभिजीत :- 11:55am – 12:39pm
शुभ वेला :- 12:27pm – 01:40pm
कुम्भ लग्न :- 02:05pm – 03:33 pm
गोधूली :- 03:00pm – 05:45pm
वृषभ लग्न :- 06:35 pm – 08:31 pm
लाभ वेला :- 09:03pm – 10:48pm
मिथुन लग्न :- 08:31 – 10:46 pm
लाभ वेला :- 09:03pm – 10:40pm
सिंह लग्न :- 01:06 am 03:23 am
उपरोक्त मुहूर्तों के आधार पर आप महालक्ष्मी का पूजन कर सकते है ! कोई भी बंधूँ इस भ्रांति में ना रहे कि अमावस तिथि 06:18 तक है उसके बाद पूजन नहीं होगा यह एकदम निराधार है हालाँकि अमावस प्रदोष काल में दूसरे दिन 24 मिनट से भी अधिक है तो उसे संपूर्ण रात्रि को महालक्ष्मी पूजन होता है
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026



