






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 नवंबर 2024। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 15 – Nov – 2024
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि पूर्णिमा +03:00 AM
🔅 नक्षत्र भरणी 09:55 PM
🔅 करण :
विष्टि 04:39 PM
बव 04:39 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग :
व्यतीपात 07:29 AM
वरियान 07:29 AM
🔅 वार शुक्रवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:56 AM
🔅 चन्द्रोदय 05:04 PM
🔅 चन्द्र राशि मेष
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 05:41 PM
🔅 चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:45 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:57:01 – 12:40:02
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 09:05 AM – 09:48 AM
🔅 कंटक 01:23 PM – 02:06 PM
🔅 यमघण्ट 04:15 PM – 04:58 PM
🔅 राहु काल 10:57 AM – 12:18 PM
🔅 कुलिक 09:05 AM – 09:48 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:49 PM – 03:32 PM
🔅 यमगण्ड 02:59 PM – 04:20 PM
🔅 गुलिक काल 08:16 AM – 09:37 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ
📜 चोघडिया 📜
🔅चल 06:56:01 – 08:16:38
🔅लाभ 08:16:38 – 09:37:16
🔅अमृत 09:37:16 – 10:57:54
🔅काल 10:57:54 – 12:18:31
🔅शुभ 12:18:31 – 13:39:09
🔅रोग 13:39:09 – 14:59:47
🔅उद्वेग 14:59:47 – 16:20:25
🔅चल 16:20:25 – 17:41:02
🔅रोग 17:41:02 – 19:20:31
🔅काल 19:20:31 – 20:59:59
🔅लाभ 20:59:59 – 22:39:27
🔅उद्वेग 22:39:27 – 24:18:55
🔅शुभ 24:18:55 – 25:58:23
🔅अमृत 25:58:23 – 27:37:51
🔅चल 27:37:51 – 29:17:19
🔅रोग 29:17:19 – 30:56:47
❄️ लग्न तालिका ❄️
🔅 तुला चर
शुरू: 04:44 AM समाप्त: 07:00 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:00 AM समाप्त: 09:22 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 09:22 AM समाप्त: 11:26 AM
🔅 मकर चर
शुरू: 11:26 AM समाप्त: 01:09 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 01:09 PM समाप्त: 02:38 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:38 PM समाप्त: 04:04 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 04:04 PM समाप्त: 05:40 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 05:40 PM समाप्त: 07:36 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:36 PM समाप्त: 09:51 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 09:51 PM समाप्त: अगले दिन 00:11 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 00:11 AM समाप्त: अगले दिन 02:28 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 02:28 AM समाप्त: अगले दिन 04:44 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺
दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
☘️ कार्तिक पूर्णिमा व्रत , मणिकर्णिका स्नान , पुष्कर स्नान ,
🎇 देव दिवाली 🎇
। मनुष्यो की दीपावली मनाने के एक पक्ष अर्थात 15 दिनों के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली अर्थात देव दीपावली होती है।
मान्यता है कि देव दीपावली मनाने के लिए सभी देवतागण स्वर्ग से धरती पर गंगा नदी के पावन घाटों पर अदृश्य रूप में आते हैं। देव दीपावली दीपावली समारोह का अंतिम उत्सव है।
एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु जी अपने वामन अवतार के बाद, बलि के पास से लौटकर अपने निवास स्थान बैकुंठ लोक में वापस आये थे और इसी खुशी में सभी देवो ने दीप जलाए थे ।
एक अन्य कथा के अनुसार इसी दिन सायंकाल के समय भगवान विष्णु जी का मत्स्यावतार हुआ था, इसलिए इस दिन किये गए दीप दान, का दस यज्ञों के समान फल मिलता है।
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि आज के दिन ही भगवानशंकर ने महाभयंकर असुर त्रिपुरासुर का संहार किया था जिसके पापो से मनुष्य, ऋषि, देवता सभी त्रस्त थे।
त्रिपुरासुर और उसकी असुरी सेना के संहार के पश्चात सभी देवताओं ने दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा अर्चना, आराधना की थी, प्रसन्नता व्यक्त की थी इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाई जाती है ।
देव-दीपावली महोत्सव बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी / वाराणसी में गंगा तट पर बहुत भव्यता से मनाया जाता है, इस उत्सव को देखने के लिए देश से ही नहीं, वरन दुनिया भर से लोग काशी आते है।
कार्तिक पूर्णिमा की रात में काशी में गँगा नदी के घाटों पर हजारों दीपक जलाकर माँ गंगा की महा आरती होती है, यह अवसर अत्यंत अदभुत प्रतीत होता है, ऐसा प्रतीत होता है कि आकाश के तारे दीपको में उतर आये है
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026




