May 20, 2026
2-feb

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 फरवरी 2025। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 02 – Feb – 2025
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि :
चतुर्थी 09:16 AM
पंचमी 09:16 AM
🔅 नक्षत्र उत्तराभाद्रपद +00:53 AM
🔅 करण :
विष्टि 09:16 AM
बव 09:16 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग :
शिव 09:13 AM
सिद्ध 09:13 AM
🔅 वार रविवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:21 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:48 AM
🔅 चन्द्र राशि मीन
🔅 चन्द्र वास उत्तर
🔅 सूर्यास्त 06:14 PM
🔅 चन्द्रास्त 10:23 PM
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:53 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत माघ
🔅 मास पूर्णिमांत माघ

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:26:04 – 13:09:37
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:47 PM – 05:31 PM
🔅 कंटक 10:58 AM – 11:42 AM
🔅 यमघण्ट 01:53 PM – 02:36 PM
🔅 राहु काल 04:52 PM – 06:14 PM
🔅 कुलिक 04:47 PM – 05:31 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 12:26 PM – 01:09 PM
🔅 यमगण्ड 12:47 PM – 02:09 PM
🔅 गुलिक काल 03:31 PM – 04:52 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅उद्वेग 07:21:06 – 08:42:47
🔅चल 08:42:47 – 10:04:29
🔅लाभ 10:04:29 – 11:26:10
🔅अमृत 11:26:10 – 12:47:51
🔅काल 12:47:51 – 14:09:32
🔅शुभ 14:09:32 – 15:31:13
🔅रोग 15:31:13 – 16:52:54
🔅उद्वेग 16:52:54 – 18:14:35
🔅शुभ 18:14:35 – 19:52:49
🔅अमृत 19:52:49 – 21:31:04
🔅चल 21:31:04 – 23:09:19
🔅रोग 23:09:19 – 24:47:34
🔅काल 24:47:34 – 26:25:49
🔅लाभ 26:25:49 – 28:04:04
🔅उद्वेग 28:04:04 – 29:42:19
🔅शुभ 29:42:19 – 31:20:34

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 मकर चर
शुरू: 06:15 AM समाप्त: 07:31 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 07:31 AM समाप्त: 09:26 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:26 AM समाप्त: 10:52 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 10:52 AM समाप्त: 12:28 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 12:28 PM समाप्त: 02:24 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:24 PM समाप्त: 04:39 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 04:39 PM समाप्त: 06:59 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 06:59 PM समाप्त: 09:16 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 09:16 PM समाप्त: 11:33 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 11:33 PM समाप्त: अगले दिन 01:52 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:52 AM समाप्त: अगले दिन 04:11 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 04:11 AM समाप्त: अगले दिन 06:15 AM

🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺

दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है

🌼 आज बसंत पंचमी का महापर्व है । इस दिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती देवी की आराधना परम फलदाई मानी जाती है ।
शास्त्रों के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी के शुभ दिन में पत्तों पर जल छिड़कने से ही विद्या की अधिष्ठात्री देवी का अवतरण हुआ जिनके एक हाथ में वीणा, दूसरा हाथ में वर मुद्रा और अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी एवं जिनका वाहन मयूर ( मोर) था ।

“ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:”

इस दिन सभी के साथ संयमपूर्वक शुभ और प्रेम वचन बोलने से ईश कृपा प्राप्त होती है।

माँ सरस्वती मनुष्य के शरीर में उसके कंठ और जिह्वा में निवास करती है जो वाणी और स्वाद का स्वरूप है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन बोले गए वाक्य शीघ्र सफल होते है। अतः इस दिन शुभ वचन ही बोलने चाहिए ।

आज के दिन मेवे युक्त पीले मीठे चावल, पीली मिठाइयों, फलो को भगवान को अर्पित करके इनका सेवन करना चाहिए ।

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल चढ़ाकर देवी सरस्वती को श्वेत वस्त्र पहनाएं / अर्पण करें ।

भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वसंत पंचमी को अति शुभ माना गया है, इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त घोषित किया गया है। अर्थात इस दिन कोई भी काम बिना मुहूर्त देखे ही किया जा सकता है।

सभी पवित्र कार्य जैसे मुंडन, यज्ञोपवीत, सगाई, विवाह , तिलक, गृहप्रवेश आदि सभी मांगलिक कार्य इस दिन अति शुभ फलदायी माने गए हैं।

बसंत पंचमी का दिन विवाह और किसी भी नए कार्य के प्रारम्भ के लिए उत्तम माना गया है ।

बसंत पंचमी के दिन होलिका का डाँड भी लगाया जाता है , इस दिन छोटे बच्चो को अक्षर ज्ञान, हाथ में कलम थमा कर उनकी शिक्षा की शुरुआत करायी जाती है ।

आज ही के दिन भगवान श्रीराम माता शबरी के आश्रम में आये थे ।

प्राचीन काल में बसंत पंचमी के दिन प्रेम के प्रतीक पर्व के रूप में कामोत्सव, मदनोत्सव, मनाया जाता था। यह दिन प्रेम का, प्रणय का दिन माना जाता था ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026