






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 अक्टूबर 2025।🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 20-Oct-2025
☀ Sri Dungargarh, bikaner
🔅 तिथि चतुर्दशी 03:46 PM
🔅 नक्षत्र हस्त 08:17 PM
🔅 करण शकुन, चतुष्पाद 03:46 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग वैधृति 02:34 AM
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:37 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:18 AM
🔅 चन्द्र राशि कन्या
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 06:00 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:12 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 11:23:18
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:55 AM 12:41 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:41 PM 01:26 PM
🔅 कंटक 08:53 AM 09:39 AM
🔅 यमघण्ट 11:55 AM 12:41 PM
🔅 राहु काल 08:02 AM 09:27 AM
🔅 कुलिक 02:58 PM 03:43 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 10:24 AM 11:10 AM
🔅 यमगण्ड 10:53 AM 12:18 PM
🔅 गुलिक काल 01:44 PM 03:09 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 अमृत 06:37 AM – 08:02 AM
🔅 काल 08:02 AM – 09:28 AM
🔅 शुभ 09:28 AM – 10:53 AM
🔅 रोग 10:53 AM – 12:18 PM
🔅 उद्वेग 12:18 PM – 01:44 PM
🔅 चल 01:44 PM – 03:09 PM
🔅 लाभ 03:09 PM – 04:34 PM
🔅 अमृत 04:34 PM – 06:00 PM
🔅 चल 06:00 PM – 07:34 PM
🔅 रोग 07:34 PM – 09:09 PM
🔅 काल 09:09 PM – 10:44 PM
🔅 लाभ 10:44 PM – 00:18 AM
🔅 उद्वेग 00:18 AM – 01:53 AM
🔅 शुभ 01:53 AM – 03:28 AM
🔅 अमृत 03:28 AM – 05:02 AM
🔅 चल 05:02 AM – 06:37 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 तुला चर
शुरू: 06:28 AM समाप्त: 08:47 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:47 AM समाप्त: 11:06 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:06 AM समाप्त: 01:10 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 01:10 PM समाप्त: 02:53 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:53 PM समाप्त: 04:21 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:21 PM समाप्त: 05:47 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:47 PM समाप्त: 07:23 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:23 PM समाप्त: 09:19 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:19 PM समाप्त: 11:34 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:34 PM समाप्त: 01:54 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 01:54 AM समाप्त: 04:11 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:11 AM समाप्त: 06:28 AM
🪔 आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🎇
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या के दिन ही भगवान श्री राम लंकापति रावण का वध कर के पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण जी के साथ अपने नगर अयोध्या वापस आए थे। उनके वापस आने पर अयोध्या के निवासियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके उनका प्रसन्नता से शानदार स्वागत किया गया था। इसी खुशी में प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या के दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि सोमवार 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 46 मिनट से लगने वाली है, यह 21 अक्टूबर को शाम 5:55 तक रहेगी ।
शास्त्रों में दीपवाली के पाँचो पर्वो को बहुत महत्त्व दिया गया है और इन सभी पर्वो में मुहूर्त को बहुत विशेष माना गया है इसीलिए विशेषकर दीपावली का पूजन
सदैव शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। चूँकि 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहेगी इसलिए दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर सोमवार को ही मनाया जायेगा ।
पूजन मुहूर्त
चंद्र हस्त योग में शुभ दीपावली पर पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त
गृहस्थ, किसान, व्यापारी, विद्यार्थी वर्ग (सभी के लिए)
प्रदोष काल सांय 6.01 से 8.32
वृषभ लग्न सांय 7.27 से 9.23
(सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त)
नौकरीपेशा के लिए
लाभ दोपहर 3.11 से 4.36
विद्यार्थियों के लिए
अमृत सांय 4.37 से 6.01
व्यापारियों के लिए
चंचल सांय 6.02 से 7.36
साधकों के लिए
लाभ रात्रि 10.47 12.22
शुभ (सिंह लग्नभी) रात्रि 1.56 से 4.14
अमृत रात्रि 3.32 से 5.07 (इसमें ब्रह्म मुहूर्त भी)
पूजन विधि:-
दिपावली की पूजा में घर के मंदिर या धन स्थान में जो भी यंत्र ( श्री यंत्र, दक्षिणीवर्ति शंख, एकाक्षी नारियल, व्यापार वृद्धि, लक्ष्मी गणेश आदि यंत्र ) रखें हो वह सभी यंत्र माँ लक्ष्मी के सामने रखकर उन सबकी पूजा भी कर लेनी चाहिए। दीपावली पूजन में कमल गट्टा, पीली सरसों, शहद, साबुत धनिया, पीली कौडिय़ां, गोमती चक्र, नाग केसर, साबुत हल्दी की गांठ, कमल का फूल आदि का अवश्य प्रयोग करें।
विधि:- गणेश जी लक्ष्मी जी को पंचामृत से स्नान करवाकर चौकी पर पिला / लाल वस्त्र लगाकर उस पर चावल का अष्टदल अथवा स्वस्तिक बनाकर उस पर प्रतिमा को स्थापित करें। दक्षिण वर्ती शंख को अक्षत डालकर उसपर स्थापित करना चाहिए,फिर दूर्वा,तुलसी एवं पुष्प की पंखुड़ी दल कर उसे जल से भर देना चाहिए। किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर नैवेद्ध ( प्रसाद ) रखें उस पर लौंग का जोड़ा अथवा इलायची रखकर तब वह सामग्री माँ लक्ष्मी जी, गणेश जी को अर्पित करनी चाहिए ।
पूजन के समय माँ लक्ष्मी के सामने अपनी तिजोरी से कुछ सोने चाँदी के सिक्के अथवा कोई भी आभूषण निकाल कर पूजन करना चाहिए।
शाम को दीवाली के पूजन से पहले आप किसी भी गरीब सुहागिन स्त्री को अपनी पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री अवश्य दिलवाएं, सामग्री में इत्र अवश्य हो।
सांयकाल लक्ष्मी पूजन के मुहर्त के समय गृहस्वामी को अपने पूरे परिवार के साथ स्नान आदि करके पीले वस्त्र धारण करके पूजा के कमरे में प्रवेश करना चाहिए , प्रवेश करते समय माँ लक्ष्मी , भगवान गणेश , कुबेर जी , इंद्र जी , माता सरस्वती का ध्यान करना चाहिए। प्रवेश करने से पूर्व तीन बार ताली बजानी चाहिए।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री



