






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 27 मई 2025। पढें आज का पंचांग जाने दिन भर का शुभ-अशुभ समय।
🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 27-May-2025
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि अमावस्या, प्रतिपदा 08:34 AM
🔅 नक्षत्र रोहिणी 02:51 AM
🔅 करण नाग, किन्स्तुघ्ना 08:34 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग सुकर्मा 10:53 PM
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:39 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 07:23 PM
🔅 चन्द्रास्त 07:59 PM
🔅 ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 13:44:13
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत वैशाख
🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:03 PM 12:58 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:23 AM 09:18 AM
🔅 कंटक 06:33 AM 07:28 AM
🔅 यमघण्ट 10:13 AM 11:08 AM
🔅 राहु काल 03:57 PM 05:40 PM
🔅 कुलिक 01:53 PM 02:48 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 08:23 AM 09:18 AM
🔅 यमगण्ड 09:05 AM 10:48 AM
🔅 गुलिक काल 12:31 PM 02:14 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 रोग 05:38 AM – 07:21 AM
🔅 उद्वेग 07:21 AM – 09:04 AM
🔅 चल 09:04 AM – 10:48 AM
🔅 लाभ 10:48 AM – 12:31 PM
🔅 अमृत 12:31 PM – 02:14 PM
🔅 काल 02:14 PM – 03:57 PM
🔅 शुभ 03:57 PM – 05:40 PM
🔅 रोग 05:40 PM – 07:23 PM
🔅 काल 07:23 PM – 08:40 PM
🔅 लाभ 08:40 PM – 09:57 PM
🔅 उद्वेग 09:57 PM – 11:14 PM
🔅 शुभ 11:14 PM – 00:31 AM
🔅 अमृत 00:31 AM – 01:48 AM
🔅 चल 01:48 AM – 03:04 AM
🔅 रोग 03:04 AM – 04:21 AM
🔅 काल 04:21 AM – 05:38 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 04:59 AM समाप्त: 06:55 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:55 AM समाप्त: 09:10 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 09:10 AM समाप्त: 11:30 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 11:30 AM समाप्त: 01:47 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 01:47 PM समाप्त: 04:03 PM
🔅 तुला चर
शुरू: 04:03 PM समाप्त: 06:22 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 06:22 PM समाप्त: 08:41 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 08:41 PM समाप्त: 10:46 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 10:46 PM समाप्त: 00:29 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 00:29 AM समाप्त: 01:57 AM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 01:57 AM समाप्त: 03:23 AM
🔅 मेष चर
शुरू: 03:23 AM समाप्त: 04:59 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺
दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है
🌼 देवकार्य अमावस्या
🌼 शनि जयन्ती
आज शनि देव जी का प्राकट्य दिवस है । शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि में ग्रहो में न्यायाधीश भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था, इसीलिए इस दिन को शनि देव जी का प्राकट्य दिवस / शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है ।
शनि देव न्याय के देवता कहे गए है, शनिदोषो से मुक्ति पाने, शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनि जयंती का दिन बहुत ही विशेष माना जाता है।
शनि देव को काला / नीला रंग अति प्रिय है। आज शनि जयंती के दिन सांय काल शनि मंदिर में शनि देव पर काला वस्त्र और सुरमा अवश्य ही चढाएं।
शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, सांय काल प्रदोष काल में ( 6 बजे से 8 बजे के बीच ) पीपल पर भी दीपक अवश्य ही जलाएं ।
शनि जयंती पर कड़वा तेल ( सरसो का तेल ) काले उड़द, काले तिल, लोहा, गुड़ एवं नीले या काले पुष्पों चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते है ।
शनि जयंती के दिन कड़वे तेल में अपना चेहरा देखकर उसका दान अर्थात छाया दान करें ।
शनि जयंती के दिन किसी गरीब मजदूर या सफाई कर्मचारियों को चाय की पत्ती का पैकेट दान में दें । इस दिन मजदूरों, सफाई कर्मचारियों को चाय पिलायें तथा बिस्कुट / पाव आदि खाने को दें । ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते है जातक को कष्टों से छुटकारा मिलता है ।
पंडित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026



