May 21, 2026
9-oct

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 अक्टूबर 2024। श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 09 – Oct – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि षष्ठी 12:16 PM
🔅 नक्षत्र मूल +05:15 AM
🔅 करण :
तैतिल 12:16 PM
गर 12:16 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग :
सौभाग्य 06:35 AM
शोभन 06:35 AM
🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:31 AM
🔅 चन्द्रोदय 12:22 PM
🔅 चन्द्र राशि धनु
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 06:10 PM
🔅 चन्द्रास्त 10:26 PM
🔅 ऋतु शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 11:39 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित कोई नहीं
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 11:57 AM – 12:44 PM
🔅 कंटक 04:37 PM – 05:23 PM
🔅 यमघण्ट 08:51 AM – 09:37 AM
🔅 राहु काल 12:20 PM – 01:48 PM
🔅 कुलिक 11:57 AM – 12:44 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 07:17 AM – 08:04 AM
🔅 यमगण्ड 07:58 AM – 09:26 AM
🔅 गुलिक काल 10:53 AM – 12:20 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅लाभ 06:31:11 – 07:58:37
🔅अमृत 07:58:37 – 09:26:02
🔅काल 09:26:02 – 10:53:28
🔅शुभ 10:53:28 – 12:20:53
🔅रोग 12:20:53 – 13:48:18
🔅उद्वेग 13:48:18 – 15:15:44
🔅चल 15:15:44 – 16:43:09
🔅लाभ 16:43:09 – 18:10:34
🔅उद्वेग 18:10:34 – 19:43:13
🔅शुभ 19:43:13 – 21:15:52
🔅अमृत 21:15:52 – 22:48:31
🔅चल 22:48:31 – 24:21:10
🔅रोग 24:21:10 – 25:53:48
🔅काल 25:53:48 – 27:26:27
🔅लाभ 27:26:27 – 28:59:06
🔅उद्वेग 28:59:06 – 30:31:45

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:54 AM समाप्त: 07:10 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 07:10 AM समाप्त: 09:29 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 09:29 AM समाप्त: 11:48 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:48 AM समाप्त: 01:52 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 01:52 PM समाप्त: 03:35 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:35 PM समाप्त: 05:04 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:04 PM समाप्त: 06:29 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 06:29 PM समाप्त: 08:05 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 08:05 PM समाप्त: 10:02 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:02 PM समाप्त: अगले दिन 00:16 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: अगले दिन 00:16 AM समाप्त: अगले दिन 02:37 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 02:37 AM समाप्त: अगले दिन 04:54 AM

सप्तम तिथि में माता के कालरात्रि स्वरूप की पूजा-आराधना की जाती है। ये माता काल अर्थात बुरी शक्तियों का नाश करने वाली हैं इसलिए इन्हें कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। नवरात्र के सातवें दिन इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इ‍स दिन पूजन करने के बाद माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026