






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 नवम्बर 2022। मौत का व्यापार, सभी है साहूकार, श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्रवासियों मत करो चीत्कार। यह पंक्ति इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ चिकित्सा सेवाओं के बेहाल-हाल पर सटीक बैठ रही है। सटीक इसलिए कि सामान्यतया मौत का व्यापार नशे, जहर के रूप में होता है और यह व्यापार करने वाले समाज में अपराधी माने जाते है। शहरवासी या मीडिया भी आवाज उठाते है तो सरकार, प्रशासन ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई भी करता है। लेकिन इसके उलट श्रीडूंगरगढ़ के चिकित्सा सेवा क्षेत्र में इन दिनों खुलेआम मौत का व्यापार साहूकारों द्वारा किया जा रहा है। ओर तो ओर आवाज उठाने पर भी कार्रवाई के बजाए बस जिम्मेदारों की आमदनी में ही इजाफा होने के आरोप सामने आ रहें है। आज श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की अनदेखी, अनकही बातों में प्रस्तुत है इसी प्रकरण के अंश।
सड़कों पर नवजात, गर्भ में हत्या, सबकी रेट फिक्स।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के सभ्य समाज के माथे पर कलंक की कालिख के रूप में आए दिन ऐसे प्रकरण सामने आ रहे है जिनमें अवैध गर्भपात से गर्भ में हत्या, अवैध प्रसव के बाद सड़कों पर फेंके गए मृत भ्रूण, रात के अंधेरे में लावारिस छोड़े गए नवजात बच्चे। इन सभी घृणित अपराधों के लिए क्षेत्र में रेट फिक्स है। सभ्य समाज में शामिल लोगों द्वारा ही ऐसा खुले आम किया जा रहा है। क्षेत्र में हालात इस कदर बिगड़े हुए है कि यहां 200 से लेकर 600 रुपए में सफाई की गोलियों के नाम पर अनेकों दवा विक्रेताओं द्वारा आसानी से किसी को भी गर्भपात की दवाईयां उपलब्ध हो रही है। गर्भ निरोधक उपाय को बंदिश मानने का मतिभ्रम आम जनता में इसीलिए तेजी से पसर रहा है कि अगर निरोधक के अभाव में गर्भ ठहर भी गया तो क्या होगा, 200 रुपए की सफाई की गोली आराम से मिल जाएगी। क्षेत्र में अनदेखी अनकही विडम्बना तो यह है कि फार्मासिस्ट के डिग्री धारक जिम्मेदार दवा विक्रेता भी आम लोगों को इन गोलियों के दुष्परिणामों को समझाने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाए बस आराम से अपनी सेल बढ़ा रहे है।
हंगामा क्यों बरपा, गर्भपात ही तो किया है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। एक शायर के गीत “हंगामा क्यों है बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है” के माध्यम से शराब सेवन को सही ठहराया गया है। यह गीत बड़ा लोकप्रिय भी हुआ है लेकिन क्षेत्र की लावारिस व्यवस्था में यही शब्द शायद उनके भी है जो अवैध रूप से गर्भपात का धंधा कर रहे है। श्रीडूंगरगढ़ के सरकारी चिकित्सालय के पास पॉलीथिन में लपेट कर फेंके गए मृत भ्रूण के शव का मामला हो या चाहे कुछ समय पहले एक निजी चिकित्सालय में अवैध गर्भपात को लेकर हुए हंगामे का प्रकरण हो, ऐसे मामले अभी लोग भूले ही नहीं कि श्रीडूंगरगढ़ थाने में अवैध गर्भपात के मामले में एक युवती की हत्या का मामला दर्ज हुआ है। इस प्रकरण में भी युवती के परिजन उसकी जान गंवाने के बाद उसके लिए तो न्याय मांग रहे है और हो सकता है कि न्याय प्रणाली में अवैध गर्भपात करने वालों को सजा भी मिल जाए लेकिन शहर की अनसुनी चित्कारें अवैध गर्भपातों में मरने वाले अनगिनत बच्चों की भी है। इनकी जिंदगी मिलने से पहले ही जान गंवाने वाले इन मासूमों की आवाज अब कौन सुने, यह अनदेखी अनकही फरियाद शायद क्षेत्र के हुक्मरानों के कानों तक पहुंच जाए।
लीपापोती में माहिर, जनता का गुस्सा पानी का बुलबुला।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में मौत का व्यापार करने वालों को भी अच्छे से पता है कि जनता का गुस्सा बस पानी का बुलबुला है ज्यादा देर तक नहीं रहेगा। पहले भी ऐसे मामले सामने आए है जिनमें लीपापोती बड़ी आसानी से कर दी गई। भले ही वह निजी चिकित्सालय का मामला हो या चाहे नवजात को फेंकने के मामले। आज तक किसी मामले में कोई दोषी जेल जाता हुआ क्षेत्र की जनता को नहीं दिखाई दिया है। हाल ही में दर्ज हुए मामले में तो मसला ही अनोखा है। अवैध गर्भपात के करीब एक माह बाद मुकदमा तो दर्ज करवा दिया गया लेकिन आरोपी की पहचान तक स्पष्ट नहीं है। मुकदमें में परिवादी द्वारा एएनएम सुलोचना को आरोपी बताया गया है लेकिन इस नाम की कोई एएनएम क्षेत्र में अभी तक चिन्हित ही नहीं हो पाई है। क्षेत्र में अनदेखी अनकही चर्चा यही है कि ऐसे में जब आरोपी का नाम ही कन्फर्म नहीं तो आरोप क्या और कैसे साबित होगें?
शहरवासियों की चित्कार, जिम्मेदार बनते है मालदार।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं के मामले में शहरवासियों की चित्कार पर कभी राहत मिली ही नहीं बल्कि इन चित्कारों से जिम्मेदार लोग और अधिक मालदार ही बनते है। क्षेत्र में जितनी भी शिकायतें आज तक चिकित्सा क्षेत्र में सरकारी या निजी सेवाओं की हुई है हर बार बस जिम्मेदार अधिकारियों की कमाई और बढ़ गई है। यह अनदेखी अनकही स्थिति के चलते ही शहरवासी अब अपने इस दर्द पर चित्कार भी नहीं कर पा रहे है। आवश्यकता है कि सक्षम अधिकारी इस संबध में हस्तक्षेप करें और इन चित्कारों पर मालदार बनने का क्रम तोड़ मानवता के हित में कार्य करें।




