






कुछ दिन पहले संसद में ऑनलाइन गेमिंग को लेकर आवाज उठी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आम जन से संवाद करने वाले कार्यक्रम ‘मन की बातÓ में भी यह सवाल आया था, तब नरेंद्र मोदी ने भी पबजी कहते हुए माना था कि यह चुनौती है। कल लाडनूं में एक ऐसा ही मसला सामने आया है, जिसमें किशोर ने अपने ही चचेरे भाई की हत्या कर दी। हत्या का तरीका भी इतना नृशंश है कि हैरत होती है।
इन सभी को देखने के बाद सवाल उठता है कि क्या सरकार इन्हें रोक क्यों नहीं पा रही है। इनसे मिलने वाले लाभ पर भी बात होनी चाहिए, जैसे सरकारें शराबबंदी इसलिये नहीं करती, क्योंकि राजस्व मिलता है। क्या इस तरह के गेम के मामले में भी ऐसा कोई जाहिर या छिपा हुआ लाभ निहित है। प्रथम दृष्टया ऐसा नजर नहीं आता कि इसे वैध बनाने के लिए सरकार ने कोई नीति तय की हो, लेकिन इसके साथ ही यह भी सवाल खड़ा होता है कि सरकार की बिना रजामंदी के अगर यह चल रहा है और सरकार इसे रोक नहीं पा रही है तो निश्चय ही यहां सरकार के आइटी स्पेशलिस्ट कमतर हैं, जो इस तरह के गेम को रोकने के लिए माकूल इंतजलाम नहीं कर पा रहे हैं और यही वजह है कि ये गेम बच्चों को तक आसानी से पहुंच रहे हैं।
दो दिन पहले इसी कॉलम में मैंने लिखा था कि सोशल मीडिया साक्षर होना जरूरी है। बच्चों की बात छोडिय़े, आम आदमी को नहीं पता कि मोबाइल के फंक्शन क्या-क्या हैं। यही वजह है कि लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। हर व्यक्ति को जरूरत है कि वह मोबाइल ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया से जुड़े हर प्लेटफाम्र्स को समझे। इसके लिए अब स्कूली पाठ्यक्रम तो तय होना ही नहीं है।
समाज में बहुत सारा ज्ञान आपस में संवाद और सीखकर ही आया है। ऐसे में यह सोचना कि सारा ज्ञान स्कूलों में ही हैं, मूर्खता होगी। फिर ऐसे योग्य शिक्षकों की भी जरूरत होगी। इससे बेहतर है कि आम जन इनके उपयोग को समझे और बच्चों को भी विश्वास में लें। यह संभव नहीं है कि ऑनलाइन गेम के खतरों का बच्चों को अहसास नहीं हों, लेकिन कई बार परिवारजनों की दूरी या नजर-अंदाजी भी इस तरह के साधनों की तरफ आकर्षित करती है। बच्चा खुद को कहीं ओर व्यस्त कर लेता है जो आखिरकार परेशानी का ही सबब बनता है।
बेहतर यह है कि सरकार इस विषय पर निगरानी करे और ऑनलाइन गेम पर पूरी तरह से पाबंदी लगाए। इसके अलावा समाज भी अपनी भूमिका को समझे। जो गलत है, वह गलत है। इसमें अगर सरकार को भी लाभ होता हो तो समाज को अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए। यह ठीक वैसा ही होगा जैसे, शराब भले ही रईसों का स्टेसस सिंबल बन चुका हो। सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलता हो, लेकिन समाज में आज भी शराब पीने वाले को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता। ऑनलाइन गेम के मामले में भी समाज को अपनी भूमिका निभाई चाहिए।




