






गांधी पार्क में मजदूर दिवस पर गूंजे एकता के नारे, श्रमिकों का किया सम्मान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गुरुवार शाम को कस्बे के गांधी पार्क में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर एकत्र हुए। सभी ने मजदूर एकता ज़िंदाबाद एकता के नारे लगाए और मजदूर अधिकारों के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। जावेद बेहलीम ने मजदूरों को एकजुट होने का संदेश देते हुए अपने हकों की लड़ाई को मजबूत करने की बात कही। कार्यक्रम में भाजपा के सुनील तावणियां ने समाज में मजदूरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते उनके संघर्ष की सराहना की। इस मौके पर मजदूरों को तोहफे के रूप में पानी की बोतलें वितरित की गईं और सभी को अल्पाहार करवाया गया। इस मौके पर कार्यक्रम में राजाराम गोदारा, राजेंद्र स्वामी, अमीर खोखर, रामनिवास बाना, साबिर अली, सुभाष जावा, सोनू, अनवर मनु, आदित्य, शाहरुख, अयूब, उस्मान, साहिल खोखर, हारुण, इमरान, राजू, कमल, सोहेल, लोकेश, विकाश, मेंहदी हशन, दलीप, ट्यूब, रंजन, उमर, कैलाश भार्गव, समीर, लालचंद, भीयाराम, मुकेश रैगर, प्रकाश रैगर, सोहेल चुनगर, खालिद, अकरम, जमील, मुबारिब, हारून, तनवीर, मांगीलाल, लतीफ, जयप्रकाश, नंदकिशोर, सैफ, महावीर, धर्मपाल, सफीक काजी, समीर बेहलीम, अलमास, असीम, नानू, नरेंद्र, राजू रैगर, बंशीलाल, सीताराम, शौकत अली, फ़हसीम, कालू रैगर, तौफीक, सूफियान सहित अनेक मजदूर मौजूद रहें।

बीकानेर में हुआ संत सम्मेलन, संतों ने किया आचार्य ओमप्रकाश घारू के भजनों का विमोचन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। प्रकाश पुंज फाउंडेशन द्वारा गुलाब कुंज में आयोजित ‘लोक संत: हमारी सामाजिक धरोहर’ व्याख्यानमाला (भाग-द्वितीय) के तहत :-‘लोक संतों की वाणी से संस्कारित एवं समृद्ध समाज का निर्माण कैसे हो?’ विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि नवल गुरु गाद्धीपति आचार्य चरणदासजी महाराज, स्वामी विमर्शानंद जी महाराज (मठाधीश, लालेश्वर महादेव मंदिर), श्रीहणुत गाद्धीपति जयकिशन महाराज रोड़ा, महंत रमेश चौहान, नवलरत्न राजकुमार सरसिया कोटा, व आचार्य ओमप्रकाश घारू द्वारा सतगुरु महर्षि नवल साहेब के तेलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य श्री चरणदास जी महाराज ने कहा,- ‘समाज का उत्थान शिक्षा, दीक्षा और संस्कारों से ही संभव है। मुख्य अतिथि स्वामी श्री विमर्शानंद जी महाराज ने कहा,-‘बदलते परिवेश में जीवन-मूल्यों की पुनः स्थापना आवश्यक है। संतों की वाणी ही समाज को संस्कारित एवं समृद्ध दिशा में ले जाने वाली शक्ति है।’ विशिष्ट अतिथि महंत श्री रमेश चौहान ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा,-‘भौतिक चिकित्सक केवल तन का उपचार करता है, जबकि संत मन के चिकित्सक होते हैं। मन के द्वंद्वों का उपचार केवल संतों के पास है।’ नवल रत्न श्री राजकुमार सरसिया ने कबीर, महर्षि नवल और हणुत साहेब जैसे संतों की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि-‘इन संतों की वाणी आज भी समाज को दिशा दे रही है।’ मुख्य वक्ता डॉ. ब्रजरतन जोशी ने ‘संत, लोक, संस्कार व धरोहर’ शब्दों की गूढ़ता को रेखांकित करते हुए उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर आचार्य ओमप्रकाश घारू के स्वरबद्ध संतवाणी भजनों का वर्चुअल लोकार्पण किया गया, जिनके संगीतकार सुजीत जावा का सम्मान भी किया गया। स्वागत उद्बोधन पूनमचंद कंडारा द्वारा तथा कार्यक्रम की भूमिका डॉ. सुभाष प्रज्ञ द्वारा प्रस्तुत की गई। फाउंडेशन के प्रतिनिधि श्याम निर्मोही ने ‘लोक संत हमारी सामाजिक धरोहर’ विषय पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में आयोजक टीम द्वारा प्रमुख अतिथियों का परिचय अमित तेजी, त्रिलोक बारासा, विनोद शागिर्द, डॉ. सुभाष चंद्र, और दीनदयाल घारू ने दिया। कार्यक्रम का संचालन नेमीचंद बारासा द्वारा दिया गया। फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. खुशबू घारू ने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संतोषानंद सरस्वती, शिवलाल तेजी, ओमप्रकाश लोहिया, चंद्रशेखर चांवरिया, दिलीप पांडे, आचार्य मंगलाराम पंडित, महंत त्रिलोक पंडित, माणक गुजराती, शिक्षाविद् सरोज तेजी, सी.डी. सिसोदिया, श्याम लाल तेजी, विनोद बारासा, गाद्धीपति अमित पंडित, बलवेश चांवरिया, बाबूलाल घारू, भरत चांगरा, थानमल पंडित, राहुल जादूसंगत, हेतराम जावा, फतेहचंद परिहार सहित अनेक गणमान्य प्रबुद्धजनों की गरिमामई उपस्थिति रही।

कोटासर गौशाला पहुंचे सारस्वत, किया सम्मान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कोटासर की श्रीकरणी गौसेवा समिति में गुरूवार को देराजसर से पत्रकार विनोद कुमार सारस्वत पहुंचे। इस दौरान उनके साथ महावीर प्रसाद सारस्वत देराजसर, धर्मेन्द्र स्वामी दुलचासर रहें। दल ने गौशाला का अवलोकन किया व गौवंश को गुड़ खिलाया। गौशाला समिति सदस्यों ने सभी अतिथियों का दुपट्टा पहना कर स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।





