






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 16 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 8 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।
गुप्त भूमिका निभा कर चाणक्य ने बना दिया माहौल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के विधानसभा चुनावों में इस बार माहौल बेहद बदला-बदला सा लग रहा है और चुनाव जमने से पहले जहां राष्ट्रवादी पार्टी के प्रत्याशी को पार्टी में ही हो रहे विरोध व अन्य कारणों से कमतर आंका जा रहा था वहीं अब चुनाव जमने के दौरान राष्ट्रवाद पार्टी के पक्ष में माहौल लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है। राजनीतिक विचारक भी इस पर अचरज में है एवं पिछले एक माह में ही आए इस त्वरित बदलाव का केन्द्र ढूंढ रहे है। राजनीतिक हलकों में चर्चा यही है कि राष्ट्रवादी पार्टी के प्रत्याशी के लिए माहौल बनाने में भूमिका अपनी व्यापारिक जिम्मेदारियों कों बखूबी निभाने वाले युवा विप्र ने गुप्त रूप से अदा की है। चर्चा है कि किसी समय में एक बंद होने की कगार पर खड़ी फर्म को खरीद कर आज कई सौ करोड़ के टर्नओवर वाली कम्पनी बनाने वाले इस युवा विप्र को अब स्थानीय भाजपा गुप्त चाणक्य का दर्जा दे रहे है। व्यक्तिगत मुलाकातों में वर्षों की नाराजगियां दूर करने की खूबी रखने वाले इस चाणक्य की चर्चा अब विरोधियों के खेमों में भी जोर पकड़ रही है।
एक साइड होने में सबसे बड़ी दिक्कत, उलझी है बड़ी रकम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र के गांवों में इन दिनों सफेद पगड़ी खासी चर्चित हो रही है और यह चर्चा इसलिए अधिक जोर पकड़ गई ये सफेद पगड़ी के दमदारों द्वारा इस बार नया ही खेल रचा जा रहा है। हर बार ये पगडियां चुनाव से पहले ही अपना पाला तय कर लेती है लेकिन इस बार हर पाले में बड़ी संख्या में इनकी मौजूदगी राजनैतिक पंडितों को भी अनुमान लगाने में भ्रमित कर रही है। लेकिन अंदरखाने की बात निकल कर आ रही है कि एक पाले में आने में सबसे बड़ी दिक्कत इस बार गांवों की सरकार के राज्य की सरकार में लंबित पडे करोड़ों रुपए के भुगतान का है। इस बार श्रीडूंगरगढ़ में चुनावी राजनीति का ऊंट किस करवट बैठे यह पहले तो निर्धारित होता दिख नहीं रहा है तो ये गांवों की सरकार के सरदारों ने इन पगडियों को अपनी ढ़ाल बनाया है। क्या पता परिणामों के बाद कौन बाहुबली बन कर उभरे लेकिन जो भी उभरेगा उसे इन सफेद पगडियों की लाज तो रखनी ही होगी ना।
हीरा है सदा के लिए, विश्वास दिलवाने की हो रही है मशक्कत।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। हीरा है सदा के लिए, भारतीय टीवी, सिनेमा पर अमिताभ बच्चन की आवाज में हीरे की ज्वैलरी के लिए यह विज्ञापन टैग लाईन तो हर किसी ने सुनी है। इसी टैग लाईन को अपने प्रचार का सबसे मजबूत पक्ष बना कर श्रीडूंगरगढ़ में निर्दलीय प्रत्याशी के सभी सर्मथक पुरजोर ताकत लगा रहे है। इस टैगलाईन पर काम करना जरूरी भी इसलिए हो गया है कि विरोधियों द्वारा चुनावों के बाद हीरे को पुन: प्रवासी हो जाने का दुष्प्रचार भी किया जा रहा है। ऐसे में हीरा है सदा के लिए यह विश्वास दिलाने में कड़ी मशक्कत हो रही है। चुंकि हीरे के परिवार का इतिहास क्षेत्र में सेवा संबधी खासी सक्रियता के साथ खड़ा है। हीरे के सभी प्रचारक कह रहे है कि भले ही उनके परिवार की पुरानी सामाजिक सक्रियता के आधार पर ही मानो, पर मानो तो सही कि, हीरा है सदा के लिए।



