






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 15 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत की जा रही है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।
काले है तो क्या हुआ दिलवाले है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पुराने समय की एक फिल्म के मशहुर गाने “काले है तो क्या हुआ दिलवाले है” तो लगभग सभी ने सुना है परंतु श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मतदाता इन दिनों इस गाने की तर्ज पर “बाहरी है तो क्या हुआ सर्मथक है” को सुन रहे है। यहां भाजपा, कांग्रेस एवं माकपा तीनों ही दलों के नेताओं ने अपनी अपनी विशाल रैलियों का आयोजन किया और अपनी ताकत दिखाते हुए हवा का रूख अपनी ओर करने के पूरजोर प्रयास किए। तीनों के ही सर्मथक आपस में एक दूसरे पर बाहरी भीड़ लाने के आरोप लगाते हुए नजर आए। इस दौरान सोशल मीडिया पर खासा ट्रेंड हो रहा है कि दूसरी विधानसभाओं के मतदाताओं का श्रीडूंगरगढ़ रैली में स्वागत है। अब इसमें बड़ी दिक्कत भी उन्हीं को हुई है जिनकी रैली को राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा सबसे बड़ी माना गया है। यहां त्रिकोणीय संघर्ष के बीच सोशल मीडिया पर तिरंगें के ट्रोलर्स को संघर्ष के सिपाही और राष्ट्रवादी ट्रोलर्स दोनों ने सामूहिक रूप से घेर लिया है और रैली में आए बाहरी वाहनों की फोटोज की बहार सोशल मीडिया पर स्वागत की टैगलाईन के साथ लगा दी है। अब बात यही है कि “बाहरी हुए तो क्या हुआ सर्मथक है”।
शुरू हुई रीमेक, क्या हो पाएगी हिट।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भारतीय हिंदी फिल्मों में इन दिनों रीमेक का बड़ा ट्रेंड आया है। कोई फिल्म पर्दे पर हिट हो जाए तो उसका रीमेक बनना भी तुरंत तय हो जाता है। श्रीडूंगरगढ़ के चुनावी पर्दे पर भी गत 2018 के चुनावों में हुई फिल्म बगावत रिलीज हुई एवं यह फिल्म चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाली हिट फिल्म साबित हुई थी। हालांकि इस बार के चुनावी पर्दे पर पहले यह कयास लगाए जा रहे थे बगावत फिल्म के निर्माता-निर्देशक-हीरो ने अपनी ढ़लती उम्र के कारण फिल्म बनाने से संन्यास लेंगे। परंतु जैसे ही रिलीज डेट निकट आई है यह बगावती हीरो फिर से फॉर्म में आते नजर आ रहा है। इस चुनाव में भी फिल्म बगावत की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है और जनता के सामने रिलीज की तैयारी भी हो गई है। देखना यह है कि इस बार यह फिल्म कितनी हिट होती है या यह फिल्म भी असली सिनेमा की तरह रीमेक फ्लॉप होने का ट्रेंड दोहराएगी।
मुद्दे गौण, सहानुभूति पर सवार सभी प्रत्याशी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के चुनावी समर में इस बार सबसे बड़ा हथियार कोई मुद्दे या विकास नहीं बल्कि सहानुभूति नजर आ रहा है। सभी यौद्धा इसी हथियार के सहारे यह जंग जितने का प्रयास कर रहे है। यहां तिरंगे के नेता को जहां दो बार हरा देने के कारण अब गल्ती भूला देने की दुहाई दे रहे है वहीं राष्ट्रवादी पार्टी के नेताजी को पिछले चुनावों में साथ नहीं देने के बाद भी पांच सालों तक पार्टी को पोषित करने की दुहाई देते देखा जा रहा है। किसानी का झंडा लिए नेताजी के संघर्ष के दिनों को भी याद किया जा रहा है एवं आंदोलनों की पुरानी फोटो मैदान में जमकर वायरल हो रही है। समाजसेवा से राजनीति में एंट्री लेने वाले नेता शहर की सरकार के चुनाव में धोखा होने की दुहाई देते हुए इस चुनाव में साथ मांग रहे है वहीं एक क्रांतिकारी संघर्ष के युवा नेता जहां पांच सालों तक हर छोटे बड़े मुद्दे में लड़ने की याद दिलाते हुए अब साथ देने की दुहाई दे रहे है। जो भी हो चुनावी गंगा में इस बार सहानुभुति की लहर पर सवार होकर ही नैया पार लगवाने का प्रयास सभी नेताओं के नजर आ रहे है।



