May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 फरवरी 2025। बुधवार को क्षेत्र में मूंगफली की सरकारी खरीद को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ और दो बार नेशनल हाइवे सहित क्षेत्र की सड़कों पर चक्का जाम किया गया। वहीं अब गुरूवार का दिन शांति से गुजरने के बाद शुक्रवार सुबह क्षेत्र में ट्रोमा की मांग को लेकर एक बड़े आंदोलन की दस्तक सुनाई पड़ रही है। पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया की अगुवाई में ट्रोमा की मांग को लेकर सैंकडों लोग एकत्र होंगे और ट्रोमा सेंटर को लेकर राजनीति के आरोप लगाते हुए अपना विरोध-आक्रोश जताएंगे। एसडीएम ऑफिस के सामने ही ट्रॉमा के लिए प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ट्रॉमा सेंटर के लिए आक्रोशित क्षेत्रवासी पार्टी भेद छोड़ कर एकजुटता दिखाएंगे।

पिछले एमओयू को निर्माण स्वीकृति नहीं, नया एमओयू नहीं, बजट में कोई चर्चा नहीं, जबरदस्त नाराजगी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ में गत सरकार द्वारा घोषित ट्रॉमा सेंटर के लिए 1.20 स्कवायर फ़ीट निर्माण के लिए दानदाता द्वारा स्वीकृति देने पर एमओयू हुआ था। सरकार बदलने के बाद इस निर्माण के अलावा और भी कई निर्माण जोड़ते हुए ट्रॉमा निर्माण के लिए दानदाता के सामने नई शर्ते डाली जा रही है। ऐसे में लोगो की मांग थी कि या तो 1.20 लाख स्कवायर फ़ीट निर्माण के लिए तैयार दानदाता को निर्माण स्वीकृति दी जाए, या फिर नया एमओयू कर जल्द नई शर्तों के अनुसार और अधिक निर्माण के लिए आदेशित कर ट्रॉमा निर्माण शुरू किया जाए, या फिर बजट में सरकार द्वारा ही ट्रॉमा का निर्माण करवाया जाए। लेकिन लंबे समय के आंदोलन के बाद भी यह तीनों ही स्थिति बनते नजर नहीं आ रही है। ऐसे में ट्रॉमा के अभाव में क्षेत्र में आए दिन हो रही मौतों से क्षेत्रवासी आक्रोशित है और राजनीतिक भेद छोड़कर अब ट्रॉमा के लिए एकजुट होते नजर आ रहे है। पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने कहा कि ट्रोमा सेंटर के निर्माण के लिए एक साल से क्षेत्र की जनता संघर्ष कर रही है, लेकिन केवल राजनीतिक द्वेषता के कारण ट्रॉमा के निर्माण में रोड़े अटकाए जा रहे है।
सैंकडो मौते, हजारों हताहत, लाखों हुए प्रभावित।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र से गुजरने वाले हाइवे हादसे के हाइवे बन चुके है। लंबे समय तक लगातार सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के बाद गत सरकार जागी और दानदाता को ट्रॉमा सेंटर भवन बनवाने के अनुमति देते हुए ट्रॉमा सेंटर संचालन की घोषणा की थी। इसका शिलान्यास भी हुआ था लेकिन सरकार बदलने के साथ ही ट्रॉमा बनाने की शर्तें बदल दी गई और मामला उलझ गया है। यह विडम्बना की स्थिति हो गई कि ट्रॉमा की घोषणा से अब तक क्षेत्र में ट्रॉमा के अभाव में 150 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। सैंकडों मौतों, हजारों हताहतों और लाखों लोगो के प्रभावित होने के बाद भी ट्रॉमा के लंबित ही रहने के कारण अब क्षेत्रवासी पार्टी भेद छोड़ कर ट्रॉमा के लिए लामबंद हो रहें हैं।