






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 दिसबंर 2021। दहेज एक सामाजिक कुरीति है ये समझाते हुए सरकार को कई वर्ष बीत गए है परन्तु जनप्रतिनिधियों की इसमें पूर्ण स्वीकृति नहीं होने के कारण ये समाज में अत्यधिक प्रचारित नहीं हो पाया है। उल्टे जनप्रतिनिधि अधिक से अधिक दहेज लेने व देने में अपनी शान समझते है ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेनीसर के पूर्व सरपंच ने दहेज को सख्ती से ना कह कर एक मिसाल पेश की है। सरकारी सेवा में वर हो तो दहेज में गाड़ी से लेकर महंग इतंजामात में वधू पक्ष को भारी खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में पूर्व सरपंच लालचंद सिद्ध ने विद्युत विभाग में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत अपने पुत्र विशाल सिद्ध का विवाह गंगानगर निवासी भूपसिंह व आभा देवी की पुत्री निलेश्वरी के साथ बिना दहेज ही नहीं बिना किसी महंगे तोहफों के करवाई है। बी.एड. तक शिक्षित निलेश्वरी के माता पिता दोनों सरकारी सेवा में शारीरिक शिक्षक है। उन्होंने अपनी बेटी के लिए गाड़ी सहित बाटके के रस्म में एक बड़ी रकम थाली में सजा के लाए जिसे देखकर लालचंद सिद्ध नाराज हो गए। उन्होंने सख्त लहजे में विरोध जताते हुए कहा कि हमने पहले ही कहा था दहेज नहीं लेंगे। सिद्ध ने कहा कि दहेज से घर की शोभा नहीं बढ़ेगी वरन शिक्षित व संस्कारी वधू ही हमारी शोभा है। इस पर निलेश्वरी के माता पिता ने गद्गद् भाव से अपने समधी का आभार प्रकट करते हुए बेटी के भाग्य की सराहना की। उन्होंने एक रुपए व नारियल का सम्मान देकर बारात को विदा किया। गांव में ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच के इस कदम की भूरी भूरी प्रशंसा की व पलक पांवड़े बिछा कर नई बहू का स्वागत भी किया।




