






श्रीडूगरगढ़ टाइम्स 18 अप्रैल 2022। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के जागरूक युवाओं द्वारा “गेट वेल सुन सीएचसी श्रीडूंगरगढ़” की पहल अब रंग लाती नजर आ रही है। आज कड़ी धूप में इन युवाओं ने सुबह से शाम तक अस्पताल के बाहर मरीजों को रोका व उनकी पर्चियां जांची। यहां आज एक सकारात्मक बदलाव नजर आया और सीएचसी में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्चियों में बाहर की कोई दवाई या जांच नहीं लिखी गई। सभी दवाईयां सरकारी योजनााओं वाली ही लिखी गई थी और सरकार की सुविधा आमजन तक पहुंचाने की इस मुहिम से सुधार होते हुए प्रतीत हुआ। युवाओं ने बताया कि सुबह से शाम तक हॉस्पिटल की सभी पर्चिंयां जांची गई व फिलहाल कोई भी डॉक्टर बाहर की दवाई या जांच नहीं लिख रहा है। मात्र एक पर्ची में एक दवाई बाहर की लिखी पाई गई जो की मेडिसिन अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। गेट वेल सुन की इस मुहिम के तहत आज यूथ कांग्रेस के देहात जिलाध्यक्ष हरिराम बाना, राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार विनायकिया, संगठन के शहर अध्यक्ष हनुमान माली, राजेन्द्र शर्मा, श्रवण सिंह, पवन आसोपा, शुभम शर्मा, मोशिन खान, महेश पिलानिया, महेंद्र मोटसरा, पदमाराम बाना, शुभम शर्मा शामिल रहें।
पोस्टर का किया विमोचन, परेशान आमजन करें ये..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस दौरान युवाओं ने एक पोस्टर “मिशन जीवन” का विमोचन किया जिसे सीएचसी की प्याऊ पर लगाया गया है। इस पोस्टर में बाहर की दवा लिखने व अकारण जांच लिखे जाने पर परेशान आमजन को दिए गए नम्बरों पर सम्पर्क करने को कहा गया है। जिससे गेट वेल सुन के युवा मामले की जानकारी कर सरकार तक आवाज उठाने की बात कह रहे ही।
युवाओं ने चलाया जागरूकता के लिए अभियान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बता देवें श्रीडूंगरगढ़ सीएचसी में बाहर की दवाईयां लिखने का चलन लगातार बढ़ रहा था और इसकी शिकायतें व्यापक स्तर पर होने लगी थी। मीडिया में भी आमजन के हित में ये आवाज उठाई गई थी। इस मामले में जिला चिकित्सा अधिकारी भी जांच के लिए श्रीडूंगरगढ़ सीएचसी आए थे। इस पर जागरूक युवाओं ने यहां गेट वेल सुन सीएचसी की मुहिम चलाई जो अब रंग लाती नजर आ रही है। जानकारी रहें कि श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की करीब 3 लाख से अधिक की आबादी को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी श्रीडूंगरगढ़ मुख्यालय पर बने 50 बेड के इसी सीएचसी की ही है। गेट वेल सुन सीएचसी के माध्यम से युवाओं ने बाहर की दवाइयां लिखने, बाहर से जांचे करवाने, कमीशनखोरी, सफाई में अनियमितता, चिकित्सकों के समय पर सीट पर मौजूद नहीं होने जैसे कई बीमारियों से सीएचसी को मुक्त करने के लिए मुहिम चलाई है।







