






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 अक्टूबर 2022। सरकारी आंखें इतनी तेज के घास में से सूई भी ढूंढ ले लेकिन कहीं कही इतनी कमजोर के सामने से गुजरता हाथी भी ना दिखे, प्रशासन की कार्य व्यवस्था पर कहे जाने वाले इस व्यंग्य को आज साकार देखा गया क्षेत्र के गांव लखासर में। जहां जनसुनवाई करने पहुंचे जिला कलेक्टर उस समय भौच्चके रहे गए जब उनके सामने एक सरकारी भवन में 8 सालों से निजी स्कूल संचालित होने का प्रकरण आया। जिला कलेक्टर भगवतीप्रसाद कलाल गुरूवार को जनसुनवाई कार्यक्रम के तहत गांव लखासर पहुंचे, यहां स्वागत सत्कार के बाद ग्रामीणों ने अपनी समस्यांए उनको बताई व इन्हीं समस्याओं में एक समस्या लेकर आए गांव के प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र का स्टाफ।
चिकित्सालय कर्मियों ने कलेक्टर को बताया कि चिकित्सालय के पडौसी ने लेबर रूम से सटा कर शौचालय का निर्माण करवाया है एवं इस कारण लेबर रूम में प्रसव करवाने के दौरान दुर्गंध एवं इन्फेकशन का भय बना हुआ है। ऐसे में कलेक्टर ने पड़ौसी का पता किया तो पता चला के वह भूमि एवं भवन ग्राम पंचायत में पदस्थापित रहने वाले ग्राम विकास अधिकारी का सरकारी आवास है और वहां पर गत 8 वर्षों से सरस्वती विद्या आश्रम के नाम से निजी स्कूल संचालीत है। इस पर कलेक्टर ने चकित होते हुए सरकारी भवन पर निजी कब्जा होने की बात पूछी तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर कलेक्टर ने एसडीएम दिव्या चौधरी को संबधित ग्राम विकास अधिकारी को नोटीस देकर सात दिनों सरकारी भवन खाली करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान मौजुद लोगों ने स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा के संबध में सवाल उठाए तो कलेक्टर ने निजी विद्यालय संचालक द्वारा अन्यत्र व्यवस्था नहीं करवाने पर गांव के सरकारी स्कूल में इन सभी बच्चों का प्रवेश करवाने के निर्देश भी स्थानीय प्रशासन को दिए है। अब हो सकता है कि यह भवन तो खाली हो जाए लेकिन इससे यह भी साबीत हो गया कि ग्राम स्तर पर ग्रामीणों की सेवा के लिए पदस्थापित कार्मिक लंबे समय से गांव में रहना तो दुर कार्यालय भी कभी कभी ही आते है।



