






विशाल स्वामी, श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 फरवरी 2025। क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों परिसीमन की चर्चा सबसे ज्यादा जोरों पर है। क्षेत्र में ग्राम पचांयतों, नगरपालिका एवं विधानसभा क्षेत्र इन तीनों का परिसीमन होना है एवं इसी परिसीमन पर अब क्षेत्र की राजनीति का भविष्य टिका होगा। इनमें से भी अभी काम चल रहा है ग्राम पंचायतों, पंचायत समिति के पुनर्गठन पर। कहने को तो क्षेत्र के प्रशासन ने इस पर अपना पूरा होमवर्क कर प्रस्ताव भेज भी दिए थे, लेकिन गत 13 फरवरी को आए दो नए नियमों के बाद पुन: हलचल मच गई है। प्रशासन को पूरी कवायद फिर से करनी पड़ रही है। इन नए नियमों में जनसंख्या के मानदंड को आवश्यकता के अनुरूप 15 प्रतिशत घटाने या बढ़ाने की छूट दी गई तथा विशेष ये कि दूसरे नियम में नवसृजित ग्राम पंचायतों में शामिल गांवो की सीमा सहबद्ध हो। इसका अर्थ ये हुआ कि नवगठित ग्राम पंचायत में शामिल गांवो की सीमा एकदूसरे से लगी हो और किसी दूसरी ग्राम पंचायत के क्षेत्र में ना आए। दोनों ही नियमों के तहत अब प्रशासन द्वारा पूरी कागजी कार्रवाई दुबारा करनी होगी। ऐसे में आज की अनकही अनसुनी में प्रशासन के सामने आ रही समस्याओं की स्थिति देख रहे है। प्रशासन ने वर्तमान राजनीति परिदृश्य को मैनेज करते हुए पूर्व में प्रस्ताव भेज दिए थे लेकिन अब नए नियमों में वर्तमान राज को राजी कर पाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती साबित होगा। पर राज के काज, काज के ढंग (नियमों) पार पटकने होंगे।
इस तरह करने पड़ेगें बदलाव, कई सिफारिशें मानी जाना मुश्किल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। प्रत्येक परिसीमन के समय में तत्कालीन राज की सिफारिशें काफी महत्वपूर्ण रहती है। गत परिसीमन में श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका क्षेत्र के वार्डों का गठन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जहां वार्डों को कुछ इस प्रकार बांटा गया कि 40 में से 6 वार्ड तो कांग्रेस के लिए एकदम सेफ वार्ड हो गए। इसी प्रकार वर्तमान परिसीमन में वर्तमान राज की सिफारिशें को महत्व दिया जाना स्वाभाविक है। प्रशासन द्वारा पूर्व में भेजे गए प्रस्तावों में इसे ध्यान में रखा गया। लेकिन अब नए नियमों में कई सिफारिशें की क्रियान्वित मुश्किल हो रही है। उदाहरण के तौर पर बता देवें जैसे पूर्व में क्षेत्र के गांव हेमासर के साथ सालासर को मिलाकर प्रशासन द्वारा एक ग्राम पंचायत के गठन का प्रस्ताव बनाया गया। सालासर गांव की सीमा हेमासर से नहीं लगती है तो अब नए नियम के तहत सालासर को पुदंलसर में ही रखना पड़ेगा। व इस कारण हेमासर व भोजास को एक साथ रख कर नई पंचायत का गठन किया जाएगा। अब भोजास के मिलने से संभव है जनसंख्या में अधिक होने के कारण ग्राम पंचायत मुख्यालय भोजास ही बने तो हेमासर के पंचायत बनने का सपना अधुरा रह सकता है। इसी प्रकार नए नियमों में गांव अमृतवासी भी नई पंचायत बनाई जाएगी जिसमें इंदपालसर बड़ा गांव जोड़ा जाएगा। इसी प्रकार इंदपालसर बासों में कई हेर फेर होंगे। इसी तरह अनेक स्थानों पर ऐसी समस्याएं आएगी वहीं साथ ही जनसंख्या के मापदंड को घटाने बढ़ाने के साथ पूरी कसरत दूबारा की जानी होगी।
बड़ी चर्चा एक पंचायत समिति होगी भाजपा के लिए सेफ, दूसरी में आ गए सभी धुरंधर, होगी रोचक राजनीति।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रीडूंगरगढ़ में नई पंचायत समिति श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण का प्रस्ताव ऊपर भेजा गया है। वर्तमान प्रस्तावों में प्रशासन ने नेशनल हाईवे से क्षेत्र को दो भागों में बांटते हुए हाइवे के दक्षिण की ग्राम पंचायतों को मिला कर श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण पंचायत समिति एवं व हाइवे के उत्तर की ग्राम पंचायतों को मिला कर श्रीडूंगरगढ़ उत्तर पंचायत समिति में रूप में प्रस्तावित किया है। अब इसमें विशेष बात यह है कि पुराने आंकड़ों को देखा जाए तो श्रीडूंगरगढ़ उत्तर को भाजपा के लिए सेफ माना जा रहा है एवं इस पूरे क्षेत्र में बड़े नेता के रूप में केवल वर्तमान विधायक ताराचंद सारस्वत का पैतृक गांव ही शामिल है। वहीं रोचक राजनीति यह देखने को मिलेगी की श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण में पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, कांग्रेसी नेता हरिराम बाना, हेतराम जाखड़, श्रीराम भादू, मूलाराम भादू, भाजपा नेता तोलाराम जाखड़, छैलूसिंह शेखावत आदि धुरंधर नेताओं के पैतृक गांव आ रहे है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ उत्तर भाजपा के लिए सेफ एवं श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण में रोचक राजनीति देखने को मिलेगी।
पालिका क्षेत्र में नहीं होने का नियम आएगा आड़े।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। प्रशासन द्वारा पूर्व में भेजे गए प्रस्तावों में श्रीडूंगरगढ़ उपखण्ड़ मुख्यालय पर पहले से पंचायत समिति होने एवं व दूसरी का मुख्यालय भी यहीं बनाने की बात कही गई है। लेकिन नए नियमों के अनुसार अब गठित होने वाली पंचायत समिति का मुख्यालय नगरपालिका क्षेत्र नहीं होने के कारण अब नई बनने वाली पंचायत समिति का मुख्यालय श्रीडूंगरगढ़ उपखण्ड मुख्यालय पर नहीं हो सकेगा। यहां पहले से ही चल रही पंचायत समिति का मुख्यालय तो यहीं रहेगा। और नई गठित होने वाली समिति के मुख्यालय का नाम दुबारा मांगा जाना तय है।
पुरानी पंचायत समिति कार्यालय किसके हिस्से, यह भी बड़ा असमंजस।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में दो पंचायत समिति बननी तो तय हो गई है, श्रीडूंगरगढ़ उत्तर एवं श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण। ऐसे में पहले से स्थित पंचायत समिति कार्यालय को किस पंचायत समिति का मुख्यालय बनाया जाए यह बड़ा असमंजस बना हुआ है। श्रीडूंगरगढ़ उत्तर वाली पंचायत समिति का क्षेत्र, पंचायत समिति दक्षिण के क्षेत्र से पिछड़ा हुआ एंव कम सिंचित है ऐसे में इस क्षेत्र में विकास बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र की किसी पंचायत मुख्यालय को श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति उत्तर का मुख्यालय बनाने की चर्चा भी चल पड़ी है। अगर ऐसा होता है तो वर्तमान पंचायत समिति कार्यालय को श्रीडूंगरगढ़ दक्षिण का मुख्यालय बनाना पड़ेगा। वहीं दूसरी और क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल ग्राम पंचायत रीड़ी के निवासी अपने आप को श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति दक्षिण का मुख्यालय बनाने का पात्र मान रहे है एवं आबादी, भौगोलिक स्थिति एवं सड़कों, परिवहन की सुविधा के अनुसार यह मांग मजबूत भी मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है कि पुराने पंचायत समिति भवन को श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति उत्तर का मुख्यालय रखा जाएगा।
बदल जाएगी चुनावी राजनीति।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में दो पंचायत समिति होने से राजनीतिक परिदृश्य में पूरी तरह से बदलाव आ जाएगा। अनेक प्रमुख नेताओं की राजनीति अपने अपने पैतृक गांव आने वाली पंचायत समिति में सिमित हो जाएगी वहीं पूर्व की पंचायत समिति में नए नेताओं को मौका मिल सकेगा। ऐसे में सरपंच, पंचायत समिति सदस्यों व प्रधान प्रधान चुनाव की राजनीति पूरी तरह से बदल जाएगी। इस पर प्राय हर गांव में राजनीतिक रसियों में जमकर चर्चाओं का दौर जारी है।



