






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 जुलाई 2025। कहते है भैंस को काकड़े और सरकार को आंकड़े, की जरूरत होती है। इसमें धरातल पर काम होने या नहीं होने से बहुत अधिक रेख्ता नहीं रखा जाता है। ये आज भी प्राय: हर विभाग में और हर गांव में सामने आता ही रहता है। शिक्षा विभाग में भी एक ओर जहां करोड़ों का बजट और संसाधन है, उसके बावजूद वास्तविक जरूरतमंद लाभ से महरूम ही रह जाते है। गांव में बिग्गाबास रामसरा में कुछ युवाओं का जमीनी स्तर पर एक बेहतरीन पहल का प्रयास सामने आया है, जो छोटा और साधारण लग सकता है परंतु ये 30 बच्चों के भविष्य को संवारने की पहल है, जो अपने आप में खास और असाधारण बात है।
घर-घर घुमकर जगाई शिक्षा की अलख।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव के कुछ युवाओं ने मिलकर एक (EPH) Education Pushing Hands ग्रुप बनाया। ग्रुप के शिवरतन नायक ने बताया कि गांव में घर घर जाकर बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाने और नहीं भेजने वाले अभिभावकों से खूब समझाईश की गई। युवाओं ने घर घर जाकर सर्वे किया। जिसमें करीब 100 बच्चे ऐसे मिले जिनकी उम्र स्कूल जाने की थी पर वे घर पर ही थे और उनके परिजन उन्हें स्कूल भेजने को लेकर गंभीर भी नजर नहीं आए। ऐसे में ग्रुप के सदस्य घरों तक पहुंचे और समझाईश के बाद 30 बच्चों के अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने को तैयार हुए। इन बच्चों का विद्यालय से संबंधित सभी खर्च उठाने के लिए गांव के ही युवा समाजसेवी हरिओम शर्मा व एसबीआई मैनेजर राकेश ओला की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इन्होंने बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस, बैग, चप्पल, जूते जुराब का सारा खर्च उठाया। बच्चों को पूरे वर्ष कॉपियां व पेन्सिल, रबड़ पैन का खर्च भी ग्रुप ही कर रहा है। इस पूरे कार्य में तहसीलदार कुलदीप मीणा, शिवरतन नायक और ग्राम सेवक सुभाष बुरडक, एडवोकेट रामूसिंह कालवा, मांगीलाल सारण, दिनेश शर्मा, अमरचंद सुथार, राकेश नायक, अशोक नायक, कन्हैयालाल शर्मा, हरलाल गिल्ला (लोको पायलट रेलवे), बाबूलाल नायक, महावीर नायक, दिनेश गिल्ला, मुखराम जाखड़ (राजस्थान पुलिस), ओम सुथार, मोहन लाल शर्मा, ओमप्रकाश सारण फ़ौजी भी सहयोगी बने। नन्हें मुन्नों ने स्कूल से जुड़कर प्रसन्नता भी प्रकट की और पढ़लिख कर जीवन में डॉक्टर, इंजीनियर व शिक्षक तक बनने के सपने भी साझा किए। ग्रामीणों ने युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए प्रशंसा की।
साक्षर बने पूरा गांव, नहीं रहे कोई निरक्षर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्रुप के युवा समाजसेवी हरिओम शर्मा ने बताया कि आज भी गांवो में ऐसा वर्ग है जिसमें बच्चे स्कूल नहीं जाते और घर वाले उन्हें भेजने में रूचि नहीं लेते। ऐसे में हमारा लक्ष्य है कि गांव में इस वर्ग के सभी बच्चे स्कूल जाए। हम लगातार प्रयास कर रहें है कि चिह्नित 100 में से 100 बच्चे स्कूल जाए और शिक्षा ग्रहण कर सकें। इन बच्चों को पूरे वर्ष भर की स्टेशनरी भी दी जाएगी। शर्मा ने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि ये बच्चे अधिक से अधिक शिक्षा ग्रहण कर अपने जीवन को संवारे और इस में ग्रुप सदस्य पूरा सहयोग करेंगे।




