May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 फरवरी 2024। सोमवार रात मौसम ने पलटा खाया और श्रीडूंगरगढ़ अंचल के गांव शीतलनगर, कितासर भाटियान व रीड़ी की रोही में तेज तूफान आया। रात करीब 8.30 बजे तेज अंधड़ के साथ 15 मिनिट ओले गिरे और 10 अंगुल बरसात हुई। तेज अंधड़ से करीब दो दर्जन बिजली के पोल गिर गए व कई बिजली लाइनों की सप्लाई ठप्प हो गई है। ईसबगोल की फसल चौपट हो गई वहीं सरसों, मैथी में भी भारी नुकसान की आशंका है। इस इलाके के किसान नुकसान की संभावनाओं से मायूस है। गांव के पूर्णाराम पूनियां ने बताया कि खेतों में पेड़ उखड़ गए व बिजली पोल गिरने के साथ ईसबगोल की फसल तो चौपट ही हो गई। किसान किसनाराम पूनियां ने परेशान होते हुए बताया कि सरसों की फलियों से दाने निकल कर धरती में मिल गए है और किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कृषक गोपीराम पूनियां, हेमाराम पूनियां, डालूराम मेघवाल, लिछुराम पूनियां, रामप्रताप धतरवाल, हेमाराम पूनियां व रीड़ी के किसान बुधाराम जाखड़ के खेतों में खड़े अनेक बिजली पोल गिर गए है। इन किसानों ने टाइम्स को बताया कि तेज हवाओं के साथ आए वबंडर ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और पकाव पर आई सरसों के फाल व फूल तेज हवा व ओले से गिर गए है। बता देवें सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में तेज हवाएं चली व खूब धूल उड़ी। बिग्गाबास रामसरा की रोही में भी तेज हवा का असर फसलों पर नजर आया। निकटवर्ती चुरू जिले के सुजानगढ़ व बीदासर में रात 8.30 बजे तेज हवा के साथ बरसात हुई। सुजानगढ़ में चने के आकार के ओले गिरे। वहीं रतनगढ़ व राजलदेसर में भी रात बरसात हुई। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण मौसम विभाग ने बरसात व कहीं कहीं ओले की संभावना पूर्व में ही जता दी थी।
“नुकसान का जायजा लेने के लिए पटवारी पृथ्वीसिंह को मौके पर भेज दिया गया है व मौका रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का आकंलन किया जाएगा।“-राजवीर सिंह कड़वासरा (तहसीलदार)

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शीतलनगर व कितासर की रोही में तेज बवंडर ने ढहाया कहर, कई पेड़ उखड़े।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रीड़ी की रोही में गिरे ओले, तेज अंधड़ से फसलों को हुआ नुकसान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रीड़ी में भी पुराने पोल तेज हवा से टूट कर गिर गए है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ओले गिरने से गेंहू की फसलों में हुआ नुकसान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बिग्गाबास रामसरा की रोही में भी तेज हवा का असर फसलों पर नजर आया।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरसों में फूल गिरे, पकाव के दौर में किसान हुए मायूस।