






देश एक सप्ताह से अधिक समय से बिजली संकट से झुझ रहा है। जिसके लिए दिल्ली, राजस्थान, पंजाब सहित अनेक राज्य केंद्र सरकार को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं तो केंद्र सरकार इसके लिए राज्यों की लापरवाही को दोष दे रही है।
अनेक राज्यों में बिजली संकट के कारण शहरों में कटौती आरम्भ हो गई और गांवों की हालत तो बदतर है। मगर आरोप प्रत्यारोप के मध्य केंद्र के ऊर्जा मंत्री आर पी सिंह सामने आये और बिजली तथा उसके उसके लिए जरूरी कोयले की कमी न होने का दावा किया। तब जनता को लगने लगे गया कि बिजली को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। यदि कमी नहीं तो देश के अलग अलग हिस्सों में कटौती क्यों। ये सवाल उठना तो वाजिब है।
धीरे धीरे तथ्य सामने आया कि राज्यों ने बिजली उत्पादन के लिए तय सीमा का कोयला स्टॉक नहीं किया हुआ था। कोयला खत्म होने से बिजली उत्पादन कम हुआ। एक बार फिर समस्या के निदान के बजाय राजनीति शुरू हुई। राज्यों का आरोप था कि केंद्र ने मांगने के बाद भी कोयला नहीं दिया। तो दूसरी तरफ केंद सरकार व उसके दल ने सफाई दी कि राज्यों ने भुगतान नहीं किया। कोयले की कोई कमी नहीं। ये बात देश के कोयला मंत्री ने सामने आकर कही।
सरकारों की इस राजनीति में जनता को जरूर बिजली कमी सहनी पड़ रही है। किसान भी इस कमी से परेशान हुआ है और उसका काम बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है। उद्योग तो लड़खड़ा गये हैं। इसलिए बिजली की कमी न होने की बात तो बेमानी साबित हो गई।
कल केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर गैर बिजली ग्राहकों को कोल इंडिया ने आपूर्ति रोक दी है। मतलब केवल बिजली बनाने वाली कम्पनियों को ही कोयला मिलेगा। इससे स्पष्ट होता है कि कोयला उपलब्ध ही नहीं है। सीमेंट, एल्युमिनियम, इस्पात कम्पनियों के सामने तो इस आदेश से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वे तो उत्पादन कर ही नहीं सकेगी। इन चीजों की कमी महंगाई बढ़ाएगी और मार जनता को सहनी पड़ेगी।
कोयला उत्पादन की नीति भी इससे सवालिया घेरे में आ गयी है। कोयला और उसके कारण बिजली संकट का हल नहीं निकला तो महंगाई को रोकना भी मुश्किल होगा। थोड़ा सुधरी अर्थ व्यवस्था इस समस्या से फिर संकट में आयेगी। कोयले को लेकर दीर्घकालिक योजना अब जरुरी है। राजनीति अपनी जगह है मगर जन मसलों पर तो सार्थक कार्य हो, राजनीति के लिए तो दूसरे बहुत से मुद्दे हैं। बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त न हो, ये लक्ष्य पहला हो। राजनीति को प्राथमिकता न मिले।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



