May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 जनवरी 2022। मकर सक्रांति की शुभकामनाओं के साथ पढ़ें आज का पंचांग-

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 14 – Jan – 2022
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि द्वादशी 22:21:19
🔅 नक्षत्र रोहिणी 20:17:39
🔅 करण :
बव 08:58:29
बालव 22:21:19
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग शुक्ल 13:33:36
🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:27:00
🔅 चन्द्रोदय 14:58:00
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 17:59:07
🔅 चन्द्रास्त 29:17:00
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 10:32:07
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत पौष
🔅 मास पूर्णिमांत पौष

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:21:59 – 13:04:07
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
09:33:25 – 10:15:33
13:04:07 – 13:46:16
🔅 कंटक 13:46:16 – 14:28:24
🔅 यमघण्ट 16:34:50 – 17:16:58
🔅 राहु काल 11:24:02 – 12:43:03
🔅 कुलिक 09:33:25 – 10:15:33
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 15:10:33 – 15:52:41
🔅 यमगण्ड 15:21:05 – 16:40:06
🔅 गुलिक काल 08:46:00 – 10:05:01
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅चल 07:27:00 – 08:46:00
🔅लाभ 08:46:00 – 10:05:01
🔅अमृत 10:05:01 – 11:24:02
🔅काल 11:24:02 – 12:43:03
🔅शुभ 12:43:03 – 14:02:04
🔅रोग 14:02:04 – 15:21:05
🔅उद्वेग 15:21:05 – 16:40:06
🔅चल 16:40:06 – 17:59:07
🔅रोग 17:59:07 – 19:40:05
🔅काल 19:40:05 – 21:21:04
🔅लाभ 21:21:04 – 23:02:02
🔅उद्वेग 23:02:02 – 24:43:01
🔅शुभ 24:43:01 – 26:23:59
🔅अमृत 26:23:59 – 28:04:58
🔅चल 28:04:58 – 29:45:56
🔅रोग 29:45:56 – 31:26:55

❄️ लग्न तालिका❄️

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 05:26 AM समाप्त: 08:09 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 08:09 AM समाप्त: 09:13 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 09:13 AM समाप्त: 10:42 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:42 AM समाप्त: 12:08 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 12:08 PM समाप्त: 01:44 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 01:44 PM समाप्त: 03:40 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:40 PM समाप्त: 05:55 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 05:55 PM समाप्त: 08:15 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 08:15 PM समाप्त: 10:32 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 10:32 PM समाप्त: अगले दिन 00:48 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 00:48 AM समाप्त: अगले दिन 03:08 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 03:08 AM समाप्त: अगले दिन 05:26 AM

यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। सूर्य देव धनु राशि से प्रस्थान कर जब मकर राशि मे प्रवेश करते हैं तब इसे सूर्य देव का संक्रमण काल कहा जाता है। इसलिए ही इस दिन का नाम मकर संक्रांति पड़ा है। इसी दिन सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर प्रस्थान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव पिता अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं। चूंकि मकर राशि शनि का घर है इसलिए भी इसे मकर संक्रांति कहते हैं।

इसके अलावा इसी दिन महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य उत्तरायण होने पर ही अपने शरीर का त्याग किया था। इसी दिन उनका श्राद्ध कर्म तर्पण किया गया था।

इस दिन के बारे में मान्यता यह भी है कि, जब राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया था तब इंद्र देव ने छल से घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया था। जब राजा के पुत्र घोड़े को खोजते हुए आश्रम में आए तो उनको ही चोर समझ लिया गया। यह देखकर कपिल मुनि ने श्राप देकर 60000 पुत्रों को भस्म कर दिया था। तब उनके पुत्र भागीरथ इसी दिन गंगा को पृथ्वी पर ले आए थे। तब से ही इस पर्व को मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

🌞इस पर्व को कैसे मनाएं एवम इसका महत्व 🌞

प्रातः काल स्नान करें। मुमकिन तो तो गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। ऐसा मुमकिन न हो तो स्नान के पानी में ही गंगाजल डालकर उससे स्नान कर लें।
भगवान विष्णु का पूजन करें। स्तोत्र का पाठ करें।
फिर सूर्य भगवान को नमस्कार कर तिल सहित जल अर्पण करें।
फिर शुद्ध घी, कंबल, तिल, गुड़, लड्डू, खिचड़ी, सहित भोजन का ज़रुरतमंदों को दान करें।
मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी या तीर्थ किनारे किया गया दान सौ गुना फल दायक होता है।
सूर्य की संक्रांति पर आने के 8 घटी या 16 घटी तक पुण्य दान करना चाहिए। इस साल भगवान भास्कर सूर्य देव दिन मे 2:28PM पर आ रहे हैं। अतः इस दिन पुण्य काल दान आदि 2:28 से 5:17 PM तक विशेष शुभ मुहूर्त है।

इसी दिन यानी 14 जनवरी से सूर्य देव उत्तरायण मे प्रवेश करते हैं। अतः इस दिन से मांगलिक कार्यक्रम शादी विवाह या यज्ञोपवीत मुंडन एवम मंदिर निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा, आदि कार्यक्रम प्रारंभ हो जाते हैं।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
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