May 22, 2026
WhatsApp Image 2024-06-02 at 16.34.50

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 जून 2024। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि की बेतहाशा बढ़ती दरों के कारण यहां भूमि सबंधी विवादों में खासा इजाफा हो गया है। रविवार को श्रीडूंगरगढ़ थाने में अनोखा मामला सामने आया जिसमें एक अस्तित्व विहीन खसरे की सींव काटने, तार-पट्टी चोरी करने के आरोप में मुकदमेबाजी हुई है। श्रीडूंगरगढ़ थाने से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र के गांव लोडेरा निवासी रेंवतराम गोदारा ने अपने संयुक्त खातेदार इंद्रसिंह शेखावत, कुंभाराम जाखड़ व शंकरलाल सोनी के साथ खसरा नम्बर 806 का खेत खरीदा था। रेवंतराम ने हाजिर थाना होकर इस खेत के दक्षिणी दिशा के पड़ौसी कस्बे के निवासी विनोद गिरी गुंसाई पर खेत की दक्षिणी सीमा पर लगी तारबंदी व पट्टियां चोरी करने एवं सीवं नष्ट कर देने, खेत को काश्त नहीं करने देने व धमकियां देने का आरोप लगाया है। इस पर मामला दर्ज कर लिया है एवं जांच एसआई मलकीत सिंह करेगें।

पुराना है मामला, परिवादी बने नए खातेदार।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। खसरा नम्बर 806 की 11.70 हैक्टेयर भूमि का विवाद खासा पुराना है। इस भूमि के संबध में वर्ष 2015 में पटवारियों द्वारा मौका रिपोर्ट में यह माना गया था कि खसरा नम्बर 806 की भूमि कागजों में तो स्थित है लेकिन वास्तविकता में इस भूमि की कोई सीमाएं मौजूद ही नहीं है। यह खसरा श्रीडूंगरगढ़ एवं जैसलसर की राजस्व सीमा पर होने एवं सम्पूर्ण खसरा, खसरा नम्बर 797, 798, 805, 807 में कहीं पर दबा हुआ होना बताया। इसके बाद तत्कालीन खातेदार ने मामला उपखण्ड अधिकारी न्यायालय में वाद के रूप में दायर किया लेकिन वह मामला भी वर्ष 2022 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद अब 18 अगस्त 2023 में नए खातेदारों द्वारा पुराने खातेदार से रजिस्ट्री करवा ली गई। इस रजिस्ट्री में कब्जा लेकर विक्रय करने की बात लिखी हुई थी तो इसकी शिकायत पडौसियों ने तहसीलदार कार्यालय में की थी। इस शिकायत की जांच पर भी पटवारी रिपोर्ट में मौके पर खसरा नम्बर 806 का अस्तित्व ही नहीं होने व मौके पर खरीफ की फसल की बिजाई होने एवं जिन खसरों में यह खसरा विलीन हो गया उन पांच खसरो के खातेदारों के बीच पुरानी सींव व सींव में बड़े-बड़े पेड़ होने की बात प्रमाणित की गई थी। इस खसरे के सीमा ज्ञान का मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है एवं रविवार को श्रीडूंगरगढ़ थाने में दर्ज मामले के आरोपी विनोद गिरी गुंसाई द्वारा उपखण्ड अधिकारी न्यायालय में परिवादी के रूप में यथास्थिति का स्टे भी लिया हुआ है।