






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 अक्टूबर 2024। प्रदेश भर में सोलर एनर्जी के नाम पर खेजड़ी सहित हरे पेड़ों की आहुति ली जा रही है। ग्रीन एनर्जी के नाम पर मरूस्थलीय पेड़ों और जैव विविधता के विनाश का कारण ये सोलर प्लांट बन रहें है। विकास के नाम पर ये तबाही श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में भी लगातार जारी है। जगह जगह बन रहें सोलर प्रोजेक्ट हेतु समतल भूमि करने के लिए खेजड़ी सहित पेड़ो को काटा जा रहा है। गांव सांवतसर की पश्चिमी रोही व बादनूं की पूर्वी रोही में सोलर प्लांट लगवाने वाली एक कंपनी द्वारा बीती रात दो बजे खेजड़ी के पेड़ों की कटाई प्रारंभ की गई। अलवर की जेसीबी लेकर कंपनी कार्मिक भगवानाराम भूकर के खेत में पहुंचे और 9 खेजड़ी के पेड़ काट डाले। वहीं अखिल भारतीय विश्नोई महासभा व जंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा संस्था के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली। गांव सांवतसर से संतोष धारणियां व संस्था के इकाई अध्यक्ष मांगीलाल खिचड़, बजरंग धारणियां, व सुनील जाट मौके पर पहुंचे। कंपनी कार्मिकों ने जेसीबी लेकर भागने का प्रयास किया इस पर ग्रामीणों ने इनका पीछा कर घेर लिया व इन्हें रोक लिया। कुछ ही देर में मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए व गहमागहमी बढ़ गई। थोड़ी देर में जसरासर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। यहां पटवारी व गिरदावर भी पहुंच गए है व पर्यावरणप्रेमियों द्वारा आक्रोश जताया जा रहा है। यहां 9 पेड़ काटे गए है जिनमें 6 उठा लिए गए व 3 हरे खेजड़ी के पेड़ कटे हुए मौके पर पड़े है। खेत में 17 पेड़ अभी भी शेष है। बीते गुरूवार भी संस्था सदस्यों व पदाधिकारियों ने नोखा उपखंड अधिकारी व जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर खेजड़ी के पेड़ नहीं काटने का आग्रह भी किया था। खेजड़ी के पेड़ बचाने में जुटे संस्था पदाधिकारी व अन्य विश्नोई समाज के युवा यहां लगातार चार रात्रि से यहां गश्त भी कर रहें थे। संस्था के कैलाश विश्नोई ने बताया कि प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरत रहा है और संस्था द्वारा पर्यावरण के साथ खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
चार जिलों में सोलर एनर्जी के नाम पर हो रही तबाही।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। महाराजा गंगासिंह यूर्निवर्सिटी के पर्यावरण विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार छंगाणी और बिट्स रांची की डॉ ऋचा शर्मा के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि सोलर साइट्स पर 4-5 डिग्री तापमान बढ़ गया है। वहीं इससे थार की जैव विविधता भी संकट में है। उनके अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि पेड़ों को बचाने के लिए इन साइट्स की पर्यावरण ऑडिट तो दूर रजिस्ट्रेशन के समय जमीन पर पेड़ न होने का झूठा सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है। काटे गए पेड़ लगाने के बारे में कोई पॉलिसी ही नहीं बनाई गई है जिससे पर्यावरणविद् खासे चिंतित है। इस रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के चार जिले जोधपुर, बीकानेर,बाड़मेर व जैसलमेर में सोलर एनर्जी के नाम पर 25 लाख पेड़ काटे गए है जिनमें 16 लाख खेजड़ी के पेड़ है। इसके अलावा रोहिड़ा, देसी बबूल, कूमटिया भी शामिल है। ये जलवायु परिवर्तन का गंभीर कारण भी बन रहा है।




