May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 अप्रैल 2021।🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 23 – Apr – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि  एकादशी  21:50:04
🔅 नक्षत्र  मघा  07:42:51
🔅 करण :
वणिज  10:49:44
विष्टि  21:50:04
🔅 पक्ष  शुक्ल
🔅 योग  वृद्धि  14:39:31
🔅 वार  शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय  06:01:39
🔅 चन्द्रोदय  15:03:00
🔅 चन्द्र राशि  सिंह
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त  19:03:31
🔅 चन्द्रास्त  28:11:59
🔅 ऋतु  ग्रीष्म

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत  1943  प्लव
🔅 कलि सम्वत  5123
🔅 दिन काल  13:01:51
🔅 विक्रम सम्वत  2078
🔅 मास अमांत  चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत  चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित  12:06:31 – 12:58:39
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
08:38:02 – 09:30:09
12:58:39 – 13:50:46
🔅 कंटक  13:50:46 – 14:42:54
🔅 यमघण्ट  17:19:16 – 18:11:23
🔅 राहु काल  10:54:51 – 12:32:35
🔅 कुलिक  08:38:02 – 09:30:09
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  15:35:01 – 16:27:08
🔅 यमगण्ड  15:48:03 – 17:25:47
🔅 गुलिक काल  07:39:23 – 09:17:07
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल  पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅चल  06:01:39 –   07:39:23
🔅लाभ  07:39:23 –   09:17:07
🔅अमृत  09:17:07 –   10:54:51
🔅काल  10:54:51 –   12:32:35
🔅शुभ  12:32:35 –   14:10:19
🔅रोग  14:10:19 –   15:48:03
🔅उद्वेग  15:48:03 –   17:25:47
🔅चल  17:25:47 –   19:03:31
🔅रोग  19:03:31 –   20:25:39
🔅काल  20:25:39 –   21:47:48
🔅लाभ  21:47:48 –   23:09:57
🔅उद्वेग  23:09:57 –   24:32:06
🔅शुभ  24:32:06 –   25:54:15
🔅अमृत  25:54:15 –   27:16:24
🔅चल  27:16:24 –   28:38:33
🔅रोग  28:38:33 –   30:00:42

❄️लग्न तालिका ❄️

🔅 मेष  चर
शुरू: 05:33 AM  समाप्त: 07:13 AM

🔅 वृषभ  स्थिर
शुरू: 07:13 AM  समाप्त: 09:09 AM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव
शुरू: 09:09 AM  समाप्त: 11:24 AM

🔅 कर्क  चर
शुरू: 11:24 AM  समाप्त: 01:44 PM

🔅 सिंह  स्थिर
शुरू: 01:44 PM  समाप्त: 04:01 PM

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव
शुरू: 04:01 PM  समाप्त: 06:17 PM

🔅 तुला  चर
शुरू: 06:17 PM  समाप्त: 08:36 PM

🔅 वृश्चिक  स्थिर
शुरू: 08:36 PM  समाप्त: 10:55 PM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव
शुरू: 10:55 PM  समाप्त: अगले दिन 01:00 AM

🔅 मकर  चर
शुरू: अगले दिन 01:00 AM  समाप्त: अगले दिन 02:43 AM

🔅 कुम्भ  स्थिर
शुरू: अगले दिन 02:43 AM  समाप्त: अगले दिन 04:11 AM

🔅 मीन  द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 04:11 AM  समाप्त: अगले दिन 05:33 AM

❇️ विशेष – कामदा एकादशी
आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी ‘कामदा एकादशी” है। ‘कामदा एकादशी’ के प्रभाव से ब्रह्महत्या, पिशाचत्व आदि महा दोषों का नाश होता है। शास्त्रों के अनुसार ‘कामदा एकादशी” का ब्रत रखन, इसकी कथा पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के मंदिर में मोर पंख या मोर मुकुट चढ़ाना चाहिए। इससे आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

कामदा एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान श्रीविष्णु की पूजा करें।

एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।

एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।

एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का आशिक से अधिक जाप करना चाहिए ।

पं. विष्णुदत्त शास्त्री (8290814026)