May 20, 2026
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पंजाब में कांग्रेस ने सीएम के लिए चरण जीत सिंह चन्नी को सामने कर ट्रम्प कार्ड खेला है तो यूपी के दूसरे चरण में रुहेलखंड की 55 सीटों पर जातीय समीकरण बनाने पर सभी दल जोर दे रहे हैं, उसी कारण इस इलाके में भाजपा – सपा, रालोद गठबंधन में तकड़ी कशमकश हो रही है। आजम खान इसी इलाके से है।
पंजाब की कुल 117 सीटों में चन्नी का चेहरा अब बड़ा फैक्टर बन रहा है। बॉर्डर पट्टी की सभी सीटों पर दलित वोटर अब मुखर हो रहा है। भोआ, फिरोजपुर ग्रामीण, अबोहर, सुजानपुर, दीनापुर आदि सीटों पर दलित समुदाय का बड़ा वोट है, इन सीटों पर कांग्रेस ने पूरी शक्ति लगाई है। आम आदमी पार्टी को पिछले विधान सभा चुनाव में यहां सफलता नहीं मिल पाई थी मगर इस बार इस इलाके में उसने रणनीति के साथ अपने को झोंका है। इस बॉर्डर पट्टी में भाजपा और कैप्टन का गठबंधन भी कड़ी मेहनत कर रहा है। यहां किसान आंदोलन का अधिक असर न होने के कारण भाजपा गठबंधन थोड़ी राहत महसूस कर रहा है मगर गरीब घर के चन्नी का सीएम फेस उनके लिए चुनोती है। आप और भाजपा गठबंधन को यहां कांग्रेस के सीएम चेहरे से मुकाबला करना पड़ रहा है, क्योंकि दलित समुदाय उनके पक्ष में खड़ा है।
बॉर्डर पट्टी में भाजपा गठबंधन ने कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के जरिये हमलावर होने की कोशिश की है। यहां कैप्टन सिद्धू पर हमलावर है तो सिद्धू भी जवाबी हमले में पीछे नहीं है। जुबानी जंग यहां परवान पर है। पिछली बार जब कैप्टन साथ थे तो कांग्रेस ने यहां 16 में से 13 सीटें जीती थी। कांग्रेस की प्रतिष्ठा यहां ज्यादा दांव पर है। बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के साथ महंगाई, बेरोजगारी, कैप्टन की विफलता को यहां कांग्रेस मुद्दा बना रही है वहीं बाकी सभी दल व्यक्तिगत आरोप – प्रत्यारोप के जरिये पटकनी देने की कोशिश में है। अबोहर जाखड़ परिवार के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है। इस इलाके में सभी सीटों पर रोचक मुक़ाबला है। भाजपा गठबंधन यहां बड़ा चमत्कार करेगा, ये नहीं लगता मगर आप और अकाली दल गठबंधन ने यहां ताल ठोक रखी है। उसी कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है और रोचक भी।
यूपी के दूसरे चरण में रुहेलखंड के 9 जिलों की 55 सीटें आती है, ये जातीय जोड़तोड़ के चुनावी रण में उलझी है। आजम खान इसी इलाके से चुनाव लड़ रहे हैं, रामपुर इसी कारण हॉट सीट बनी हुई है। उनका मुकाबला नवाब काजिम अली खान से है। आजम के बेटे अब्दुला भी इसी क्षेत्र में जोर आजमाइश कर रहे हैं। सहारनपुर से शाहजहांपुर तक दलित, मुस्लिम वोट निर्णायक है, इसलिए उनको ही पाने के लिए मुकाबला हो रहा है। इस कारण ये कहा जाये कि यहां जातीय समीकरण हावी रहेंगे, तो गलत नहीं होगा। मुस्लिम, जाट, यादव वोटों के समीकरण के सहारे सपा – रालोद गठबंधन जहां बड़ी उम्मीद लगाये है वहीं बसपा सोशल इंजीनियरिंग के सहारे सफल होने की कोशिश में है। भाजपा, कांग्रेस ने भी यहां पूरी ताकत झोंकी है। इस चरण की 55 सीटों में जो जातीय समीकरण को साध गया, सफलता के वो ज्यादा निकट रहेगा। सपा ने पिछली बार इस इलाके से 20 सीट जीती थी। यादव बहुल बदायूं इसी इलाके में है, जो सपा का गढ़ है। इस बार रालोद भी उसके साथ है। रुहेलखंड का चुनावी समर भी जातीय कारणों से रोचक हो गया है जिससे सत्तारूढ़ भाजपा के सामने मुश्किलें है। पिछले चुनाव का प्रदर्शन दोहराने के लिए झुझ रही भाजपा को जातियों के साथ किसान आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी की समस्या से भी दो चार होना पड़ रहा है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 10 तारीख को हुई पहले चरण की वोटिंग की हवा भी यहां असर डालेगी।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार