May 20, 2026
26jan

भाजपा चार राज्यों में विधान सभा चुनाव जीतने के बाद अब एक्शन मोड पर है। उसे 2024 के लोक सभा चुनाव की तैयारी का यही अवसर ठीक लगा है और उस पर पार्टी ने काम करना भी आरंभ कर दिया है। बिना समय गंवाए पार्टी जहां अपने भीतर के असंतोष को दूर कर शक्तिशाली बनने की कोशिश कर रही है वहीं अपने कुनबे को भी विस्तार देने का प्रयास कर रही है।
इसी कड़ी में कल राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबी मुलाक़ात की। संसद भवन के कक्ष में दोनों की अकेले में बात हुई। तब से भाजपा और राजस्थान की राजनीति में कई तरह के कयास शुरू हो गये हैं।
इन कयासों की वजह भी है। क्योंकि राजस्थान भाजपा पूरी तरह से गुटबाजी से घिरी है और वर्तमान संगठन व दो बार की मुख्यमंत्री राजे के बीच दूरी जग जाहिर है। दोनों के समर्थक तो कई बार आमने सामने हुए हैं, बेनर वार भी चला है। हालांकि बोलने, व्यवहार में राजे ने कभी पार्टी की लाइन का उल्लंघन नहीं किया। वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, पार्टी की बैठकों में भी सक्रियता से जाती रही।
उनके और संगठन के बीच सब ठीक नहीं था, ये सार्वजनिक सच है। इसी कारण पिछले तीन साल में जितने भी विधान सभा उप चुनाव हुए,उनसे राजे दूर दिखी। ये भी सच है कि इन उप चुनावों में भाजपा को असफलता मिली, ये पार्टी नेतृत्त्व के लिए चिंता की बात बनी।
अब तक अपरोक्ष रूप से जनता में भाजपा के संभावित सीएम फेस भी अनेक हो गए हैं। सात नेताओं को सीएम फेस बताया जाने लगा। इसी कारण सीएम अशोक गहलोत भाजपा पर हमलावर होते रहे। हालांकि कांग्रेस भी अंतरकलह से घिरी है, मगर भाजपा की गुटबाजी के कारण वो हावी है।
राजनीति के जानकारों की मानें तो आलाकमान को अब लोक सभा चुनाव दिख रहे हैं। पिछली बार वसुंधरा के नेतृत्त्व में भाजपा ने राजस्थान की सभी 25 सीट जीती थी, उसी की चाह पार्टी को अगले लोक सभा चुनाव में है। क्योंकि यूपी में सपा, पंजाब में आप ने सेंध लगाई है। इसलिए राजस्थान के मामले में पार्टी लापरवाह नहीं बन सकती।
इन स्थितियों के कारण ही कल हुई मोदी – राजे मुलाक़ात के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। भाजपा ने चाहे कुछ भी रणनीति बनाई हो मगर ये तय है कि आने वाले दिनों में राजस्थान भाजपा की राजनीति में कुछ बदलाव अवश्य होगा, ये तय सा लगता है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार