






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 सितम्बर 2022। किसी भी क्षेत्र में सरकार व विभाग द्वारा दी गई सुविधा सबके लिए एक जैसी ही होती है लेकिन क्षेत्र के गांव डेलंवा के ग्रामीणों के साथ विद्युत निगम की लापरवाही से हो रहे भेदभाव के कारण वहां के ग्रामीण अब कहने लगे है कि साहब हमारी भी सुनवाई करो, हम पाकिस्तान में नहीं है। यह विडम्बना की स्थिति ग्रामीणों द्वारा हर स्तर पर गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से निराश होने के बाद आई है। गांव डेलंवा के सरपंच प्रतिनिधि डालूराम मेघवाल ने बताया कि पुरे श्रीडूंगरगढ़ के लगभग हर गांव में 24 घंटे घरेलू सप्लाई एवं पेयजल कुंओं के लिए 24 घंटे थ्री फेस सप्लाई मिल रही है। लेकिन डेलवां में ऐसा नहीं है एवं गुंसाईसर बड़ा के 33केवी जीएसएस से डेलंवा गांव के लिए निकलने वाले एकमात्र फीड़र में ही कृषि कुंए, गांव की घरेलू सप्लाई, पेयजल कुंए सभी जोडे हुए है। ऐसे में डेलंवा गांव में हर और बिजली की कमी से हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए एवं लगातार मांगें उठाई है। ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री, विधायक, प्रधान, पूर्व विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष, उपखण्ड अधिकारी, कलेक्टर, सहायक अभियंता, अधिक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता तक हर जगह लगातार दो वर्षों तक पत्राचार किया है एवं सभी को गांव की इस मुख्य समस्या से अवगत करवाया है।
ग्रामीणों की एकता काबिले तारीफ लेकिन विभागीय कार्यशैली से परेशान।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र के सबसे छोटे गांवों में शामिल डेलवां को गत पंचायत परिसीमन में ही पंचायत का दर्जा दिया गया था। डेलंवा एवं लाधडिया इन दो गांवों को मिला कर पंचायत बनी एवं दो वर्ष पूर्व पंचायत चुनाव में गांव में पहली बार सरपंच चुना गया। इस मौके पर भी ग्रामीणों ने गांव के विकास को राजनीति से अधिक महत्व देते हुए निर्विरोध रूप से युवा इमीचंद मेघवाल को सरपंच बनाया था। तभी से सरपंच के पिता डालूराम मेघवाल सहित पूरा गांव बिजली की इस समस्या के समाधान के लिए सामूहिक रूप से पुरजोर प्रयास कर रहा है। लेकिन विभागीय कार्यशैली से ग्रामीणों के संयम का बांध अब टूट रहा है एवं ग्रामीण आक्रोश से भर रहें हैं।
यह है समस्याएं..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। करीब 450 घरों की बसावट एवं करीब 3000 की आबादी वाले गांव डेलवां में बिजली समस्या इस कदर गहराई हुई है कि लोग पलायन के लिए मजबूर हो रहे है। ग्रामीण बच्चों को पढ़ना हो, चाहे महिलाओं को गेंहू की पिसाई करवानी हो, पीने के लिए पानी की आवश्यकता दूर करने के वाले पीएचईडी के टयूबवैल चलाने हो या अन्य जरूरी कार्य निपटाने हो। डेलवां के ग्रामीणों को यह सारे काम एक फीडर में मिलने वाली पांच-छह घंटे की सप्लाई में ही करने होते है। इससे गांव में पेयजल संकट खासा गहरा रहा है एवं पढ़ने वाले बच्चों के साथ भी अन्याय हो रहा है। सरपंच प्रतिनिधि डालूराम मेघवाल ने बताया कि गांव में 4 पीएचईडी का ट्यूबवैल और 1 ग्राम पंचायत का ट्यूबवैल है और पांचो ट्यूबवैल बिजली सप्लाई नहीं होने के कारण ठप्प पड़े है। गांव में पेयजल संकट खड़ा हो गया है और ग्रामीणों को टेंकर से पानी मंगवाना पड़ रहा है।
यह कहना है विभाग का।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डेलंवा का फीडर अलग से करने के लिए डिमांड पत्र भी विधायक कोष से भरवा दिया गया एवं विद्युत विभाग ने भी इसके टेंडर कर दो ठेकेदारों को ठेका भी दे दिया है। ठेकेदारों को सामान भी दे दिया गया है लेकिन फिर भी डेलंवा का फीडर अलग से नहीं हो पा रहा है। इस संबध में निगम के सहायक अभियंता मुकेश मालू ने बताया कि नई लाईन डालने एवं फीडर अलग करने का ठेका दे दिया गया है। अब कार्य शीघ्र ही पूर्ण होने की उम्मीद है। गांव एवं पेयजल सप्लाई के लिए अलग लाईन एवं कुंओं का फीडर अलग होने से ग्रामीणों को राहत मिल सकेगी।



