






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 सितंबर 2022। ग्रामीण अंचल के ताने बाने में सहकारी समितियों का अत्यधिक महत्व है और सामाजिक व राजनीतिक रूप से इन सदस्यों व अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की गहरी दखल भी रहती है। समिति के ऋणी सदस्य और गैर ऋणी सदस्य होते है जो समिति के चुनावों के मतदाता है। ये सदस्य 12 सदस्य कार्यकारिणी का चुनाव करते है और इन सदस्यों में से ऋणी सदस्य ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बन सकते है। ये कार्यकारिणी ग्रामीण अंचल में किसानों से जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनते है। अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का ग्रामीणों से सीधा जुड़ाव होता है और सरकारी योजनाओं से ग्रामीणों को जोड़ने के साथ अनेक नवाचार करने का दायित्व इनके पास होता है। इससे आगे भी क्रय विक्रय सहकारी समिति श्रीडूंगरगढ़ चेयरमैन के पदों पर इन समितियों के पदाधिकारियों में से ही चुनाव होगा तथा जिला स्तर व राज्य स्तर तक ये चुनाव संपन्न होते है। बता देवें प्रति 5 वर्ष में सहकारी समितियों के चुनाव करवाने का नियम है परंतु इस बार ये 11 सालों के अंतराल से करवाए जा रहें है। विधानसभा चुनाव से पूर्व सरकार ये चुनाव करवाना चाहती थी क्योंकि इससे ग्रामीण इलाकों में चुनावी फायदा मिलने के साथ ही कांग्रेस अपना लाभ भी तलाश रही है। चुंकि गांवो में काग्रेंस को अधिक समर्थन की उम्मीद रहती है और सहकारी चुनाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते है। हालांकि इसमें सिंबल प्रक्रिया नहीं होती है परंतु अप्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य पार्टी समर्थित ही होते है।
13 समितियों में निर्विरोध व 18 में होगी टक्कर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। लिखमादेसर, बापेऊ, सोनियासर, लिखमीसर, बरजांगसर, जाखासर, इंदपालसर, ठुकरियासर, संमदसर, जोधासर, ऊपनी, दुसारणा, लखासर में मतदाताओं ने निर्विरोध समिति सदस्य व अध्यक्ष उपाध्यक्ष चुन लिए है। इनकी अधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है हालांकि ग्रामीणों ने जश्न मना लिया है। शेष 18 का चुनाव पांच चरणों में होगा जिनमें प्रथम चरण शुक्रवार को पूरा हो गया है। दूसरे चरण में ऊपनी, दुलचासर, बरजांगसर, कितासर, ठुकरियासर के चुनाव करवाएं जाएंगे। इन सभी स्थानों पर 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के चुनाव की प्रक्रिया जारी है। अन्य तीसरे, चौथे व पांचवें चरण के चुनाव की चर्चाओं का दौर जोरों पर है।




