May 19, 2026
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उत्तर प्रदेश के आने वाले समय में होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए राजनीति अभी से गर्म हो गई है। प्रियंका गांधी ने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की घोषणा कर जहां सभी दलों को सकते में डाला वहीं आम आदमी पार्टी ने तीर्थ यात्रा में अयोध्या को शामिल कर नया दांव चला है। भाजपा के अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे को हल्का करने का ये प्रयास है।
बंगाल में भाजपा के आक्रामक प्रचार का मुकाबला करने के लिए ममता बनर्जी ने रवींद्र नाथ टैगोर के गीत के बोल ‘ खेला होबे ‘ का नारा देकर चुनाव लड़ा। भाजपा को टीएमसी ने करारी शिकस्त दी। खेला होबे को पूरे देश मे पहचाना गया। ये ही दो शब्द अखबारों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में सुर्खियां बने। आम बोलचाल में भी अब ये दो शब्द लोग प्रयोग में लेने लग गये हैं। ये नारा अब जन जन जान गया है।
भाजपा का मुकाबला करने के लिए अब सपा के अखिलेश यादव ने यूपी के लिए इसी तर्ज पर नारा दिया है ‘ खदेड़ा होबे ‘। अब ये तो चुनाव परिणाम बतायेंगे कि ये नारा कितना कामयाब होगा। जनता की जुबान पर चढ़ेगा या नहीं। यूपी में सभी दल धर्म का सहारा तो ले रहे हैं मगर अब खदेड़ा होबे नारा देकर चुनाव की गर्मी बढ़ा दी है।
ओम प्रकाश राजभर सपा के साथ आ गये हैं और उन्होंने भी अखिलेश यादव के नारे खदेड़ा होबे को दोहरा दिया है। मऊ में इन दोनों नेताओं ने बुधवार को संयुक्त रैली की और खदेड़ा होबे का नारा दिया। अखिलेश अति पिछड़ी जातियों को साथ लेकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और उसी क्रम में उन्होंने ओमप्रकाश राजभर को साथ लिया है, जिनकी जाती के पूर्वांचल में 4 फीसदी वोट माने जाते हैं। ये गठबंधन भाजपा के लिए पूर्वांचल में बड़ी चुनोती बनेगा।
अखिलेश और ओमप्रकाश राजभर ने कोरोना काल मे यूपी के लोगों के देश से पलायन कर वापस आने और उनकी सुध न लेने को मुद्दा बनाया है। कमजोर तबके और अति पिछड़ी जातियों की दुखती रग को इन दलों ने खदेड़ा होबे का नारा देकर सहलाया है। 11 महीनें से आंदोलन कर रहे किसान भी इसी भावभूमि पर अड़कर भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। खेला होबे की तर्ज पर कहे गये खदेड़ा होबे को कितनी सफलता मिलेगी, ये तो आने वाला समय बतायेगा। मगर इस नारे से अखिलेश और ओमप्रकाश राजभर ने चुनाव में गर्मी जरूर भर दी है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार