






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 अप्रैल 2025। 1965 और 1971 के भारत पाक युद्धों में भाग लेने वाले भारतीय सेना के जवान रहें उदरासर के अमरसिंह पूनियां अपने भरे पूरे परिवार को छोड़कर शनिवार को अन्नंत की यात्रा पर चले गए है। शनिवार को पार्थिव देह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। 81 वर्षीय अमरसिंह अपने मिलनसार व सादगी भरे व्यक्तित्व से गांव भर के चहेते थे। वे जब भारत पाक युद्धों के किस्से सुनाते तो युवा व बच्चों के मनों में राष्ट्र प्रथम का जज्बा भर जाता। वे चूरू के हरपालु से गांव उदरासर आकर बसे और सदा के लिए यहीं के होकर रह गए। उनके परम मित्र गांव के बुजुर्ग सीताराम जाखड़ व सांवताराम जाखड़ ने नम आंखों से बताया कि 1965 के भारत पाक युद्ध में अमरा ने अद्भुत शौर्य का परिचय दिया। 1971 के भारत पाक युद्ध में उनके पैर में गोली लगी। ये गोली तीन दिन पैर में धंसी रही और फिर भी वे वीरता के साथ सरहद पर डटे रहें। उनके पौते विनोद व रोहित ने बताया कि दादाजी पाकिस्तान को मिली करारी शिकस्त, 90 हजार पाक सैनिकों के आत्मसमर्पण, बांग्लादेश के जन्म के बारे में कई किस्से पूरी दखल के साथ सुनाते तो बच्चे व युवा नहीं बड़े बुजुर्ग भी बस सुनते ही रहते थे। उनके दो बेटे भी सेना में देशसेवा कर रहें है व एक पुत्र बेल्ट सर्विस में ही सेवाएं दे रहें है। वहीं एक पुत्र गांव की राजनीति में सक्रिय है। शनिवार को अमरसिंह की मृत्यु से शौर्य के किस्से सदा के लिए शांत हो गए और पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया है। ग्रामीण उनकी मृत्यु पर शोक प्रकट कर रहें है।



