May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 जुलाई 2023। महाराष्ट्र में शरद पंवार की एनसीपी टूटने से वहां की शिंदे – भाजपा सरकार को सीटों की गणित का कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि अभी भी बहुमत उनके ही पास था। बहुमत का आंकड़ा जरूर बढ़ गया। भाजपा इस बंटवारे से केवल अगले आम चुनाव में लोकसभा सीट इस प्रदेश से अधिक मिलने के आसार देख रही है। मगर इस लाभ को पाने के लिए किए प्रयास से वो भूल गई कि एनसीपी की टूट से यकायक भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस ताकतवर विपक्ष बनकर उभर गई है। इस आंकलन की तरफ शायद भाजपा की नजर ही नहीं गई।
महाअगाडी गठबंधन में अभी नेता प्रतिपक्ष का पद अब तक एनसीपी के पास था, जिस पर अब कांग्रेस का दावा हो गया है। वो महाराष्ट्र का मुख्य विपक्षी दल बन गई है। क्योंकि इससे पहले गठबंधन में शामिल शिव सेना भी टूटकर कमजोर हो गई है। गठबंधन के दोनों क्षेत्रीय दल टूटकर कमजोर हुए तो नैसर्गिक राजनीतिक फायदा कांग्रेस को हो गया। जबकि अभी ये भी तय नहीं है कि शिव सेना के शिंदे गुट व एनसीपी के अजीत गुट कितनी अवधि तक अपने विधायक संभाल के रख सकेंगे।
मतदाताओं की दृष्टि से देखें तो भाजपा के विपक्ष के मतों पर मजबूत दावा अब उद्धव व शरद पंवार से अधिक कांग्रेस का हो गया है। जाहिर है उसका नुकसान भाजपा को होगा। निजी चैनल एनसीपी की टूट पर जनता की जो ओपिनियन ले रहे हैं उसमें भी ये दिख रहा है कि जनता इस विखंडन को गलत व अनुचित मानती है। कल शरद पंवार व अजीत पंवार के गुटों की अलग अलग बैठक हुई। बेशक अजीत के साथ विधायक ज्यादा थे, सांसद कम। शरद पंवार के साथ कार्यकर्ता व नेता ज्यादा दिखे जो कह रहे थे कि विधायक भले ही अजीत के साथ चले गये हों, मगर कार्यकर्ता व वोटर शरद पंवार के साथ है। बैठकों की भीड़ से भी ये बात स्पष्ट हो रही थी।
अब मंत्री पद को लेकर भी शिंदे गुट, अजीत गुट, भाजपा में खींचतान होगी। क्योंकि दोनों गुटों में टूटकर आये विधायक मंत्री पद तो चाहते ही हैं, जो हरेक को मिलना सम्भव नहीं। उससे असंतोष गहरायेगा। जिसका खमियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा। असर आम चुनाव पर भी होगा। कांग्रेस इस स्थिति का लाभ उठा मजबूत होने के लिए जोर लगायेगी।
कुल मिलाकर महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण अभी तो बदलने शुरू हुए है, जो ट्रेलर है। अभी बदलाव की पूरी फिल्म सामने आनी बाकी है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और राजनीतिक टूटन देखने को मिलेगी और आम चुनाव व राज्य चुनाव तक नये समीकरण बनेंगे। कांग्रेस प्रेक्षक से अब महाराष्ट्र में मुख्य भूमिका में आ गई, इसमें कोई संदेह नहीं।
मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार